बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 105 | Moderate 01:02 IST

हाई कोर्ट का आदेश: नागपुर शिक्षक भर्ती के दस्तावेजों की जांच करें शिक्षा उपसंचालक

नागपुर में एक शिक्षक की नियुक्ति के विवाद में हाई कोर्ट ने शिक्षा उपसंचालक को प्रस्ताव और दस्तावेजों की सच्चाई जांचने को कहा है। विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करनी होगी।

हाई कोर्ट का आदेश: नागपुर शिक्षक भर्ती के दस्तावेजों की जांच करें शिक्षा उपसंचालक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में एक शिक्षक की नियुक्ति से जुड़े विवाद में हाई कोर्ट ने शिक्षा उपसंचालक को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश प्रवीण पाटिल ने अमर स्मृति बहुउद्देशीय एजुकेशन सोसाइटी और अन्य की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद उन्होंने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई।

अदालत ने उपसंचालक से तीन बातें साफ करने को कहा है। पहली, शिक्षा अधिकारी ने शपथ पत्र के साथ जो प्रस्ताव पेश किया, क्या वह सच में याचिकाकर्ता प्रबंधन ने शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को भेजा था। दूसरी, क्या कार्यालय में इसकी प्रविष्टियां विधिवत दर्ज की गई थीं। तीसरी, प्रस्ताव के साथ लगे दस्तावेज असली हैं या नहीं। इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करनी होगी।

विवाद की जड़ में एक कर्मचारी की नियुक्ति है। याचिकाकर्ता प्रबंधन का दावा है कि वर्ष 2009 में प्रतिवादी कर्मचारी को स्कूल के गैर-अनुदान प्राप्त वर्ग में अस्थायी पद पर रखा गया था। प्रबंधन के मुताबिक उसके तुरंत बाद उसने स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद उसने रौरंध अपर प्राइमरी स्कूल, चैतन्य नगर, नारी में जुलाई 2009 से मई 2010 तक और फिर जुलाई 2010 से सितंबर 2011 तक सेवाएं दीं।

प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारी उसके स्कूल में नियुक्त ही नहीं थी, इसलिए सेवा समाप्ति का सवाल ही पैदा नहीं होता। कर्मचारी का पक्ष इसके उलट है। उसने स्कूल ट्रिब्यूनल के सामने अपील दायर की और दावा किया कि उसकी नियुक्ति कानून के हिसाब से सही प्रक्रिया का पालन करके हुई थी। उसके मुताबिक इसके लिए विज्ञापन निकाला गया, साक्षात्कार हुआ और सोसाइटी का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

इसी विवाद को देखते हुए अदालत ने 10 दिसंबर 2024 को याचिकाकर्ता प्रबंधन और शिक्षा अधिकारी, दोनों को तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया था। इसके पालन में शिक्षा अधिकारी ने 18 दिसंबर 2024 को शपथ पत्र के साथ वह प्रस्ताव दाखिल किया, जो उनके अनुसार याचिकाकर्ता ने उनके कार्यालय को भेजा था। उसके साथ सोसाइटी का प्रस्ताव और विज्ञापन की प्रति समेत सभी संबंधित दस्तावेज संलग्न थे।

इसके बाद प्रबंधन ने 23 जनवरी 2025 को अपना शपथ पत्र दायर किया और भर्ती के विज्ञापन पर संदेह जताया। प्रबंधन के अनुसार उस पत्र के साथ लगा विज्ञापन वर्ष 2003 का प्रतीत होता है। प्रबंधन का कहना है कि यह दस्तावेज संदिग्ध तरीके से बनाया गया लगता है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन्हीं सवालों की पड़ताल अब शिक्षा उपसंचालक करेंगे और उनकी रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे का रुख तय करेगी।

#नागपुर#PT24#Nagpur

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे