सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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नागपुर हाई कोर्ट से सिद्धार्थ ढंगरे व अन्य को राहत, कब्जे में दखल पर रोक

राजे भोसले की संपत्ति के मामले में हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक याचिकाकर्ताओं के कब्जे में खलल न डालने को कहा।

नागपुर हाई कोर्ट से सिद्धार्थ ढंगरे व अन्य को राहत, कब्जे में दखल पर रोक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर हाई कोर्ट ने राजे भोसले की संपत्ति से जुड़े एक मामले में सिद्धार्थ ढंगरे और अन्य याचिकाकर्ताओं को अंतरिम सुरक्षा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगले आदेश तक याचिकाकर्ताओं के कब्जे में कोई खलल न डाला जाए।

मामला अधीनस्थ न्यायालय के उन आदेशों से शुरू हुआ, जिनमें संपत्ति को लेकर उठाई गई अलग-अलग आपत्तियों को खारिज कर दिया गया था। इन्हीं आदेशों के खिलाफ सिद्धार्थ ढंगरे और अन्य ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सुनवाई के बाद न्यायाधीश नंदेश देशपांडे ने याचिकाकर्ताओं को यह अंतरिम राहत दी।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद जायसवाल ने कोर्ट में दलील रखी। उनका कहना था कि आपत्तियों को खारिज करने वाला आदेश कानूनी नजर से टिकने लायक नहीं है।

जायसवाल ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता रानी कमलराजे भोसले की वंशावली के आधार पर संपत्ति पर अपना हक जता रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संपत्ति की पहचान को लेकर गंभीर विवाद है। वकील के मुताबिक संबंधित संपत्ति पर याचिकाकर्ताओं का वैध मालिकाना हक और भौतिक कब्जा लगातार बना हुआ है। इसी वजह से कोर्ट से उनके शांतिपूर्ण कब्जे को सुरक्षित रखने की गुजारिश की गई।

कोर्ट ने प्रतिवादी राजे रघुजीराव अजीत सिंह भोसले और अन्य को नोटिस जारी किया है। राजे रघुजीराव अजीत सिंह भोसले का पक्ष मुख्तारनामा धारक वासुदेव एस. अग्रवाल के जरिए रखा जाएगा। अंतिम निपटारे के लिए इन प्रतिवादियों से 28 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इजाजत दी है कि वे सभी उपलब्ध तरीकों से नोटिस की तामील करा सकते हैं। साथ ही उन्हें तय तारीख से पहले तामील का हलफनामा कोर्ट में पेश करने का निर्देश भी दिया गया है। अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि याचिकाकर्ताओं के कब्जे में खलल न डाला जाए।

कब्जे को लेकर चल रहे इस विवाद में हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश को अहम माना जा रहा है। फिलहाल याचिकाकर्ताओं का मौजूदा कब्जा सुरक्षित रहेगा, यानी मामले के अंतिम फैसले तक स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रतिवादियों के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर तय होगी। हालांकि, इस अंतरिम राहत को संपत्ति के अंतिम मालिकाना हक पर फैसला नहीं माना जा सकता।

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