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दिवाली से पहले सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम मदद, कैबिनेट की मंजूरी

दिवाली से पहले सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों को 5,000 रुपये की अग्रिम मदद, कैबिनेट की मंजूरी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों को दिवाली से पहले 5,000 रुपये अग्रिम देने का फैसला मंजूर कर लिया। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। फसल के नुकसान और पानी की किल्लत के बीच राज्य सरकार किसानों को फौरन राहत देना चाहती है।

फडणवीस ने 14 अक्टूबर को यह फैसला बताते हुए कहा कि सरकार इसके लिए इंतजार नहीं करेगी कि केंद्र सूखा सहायता जारी करने की अपनी प्रक्रिया कब पूरी करता है। यह रकम अंतरिम राहत के तौर पर सीधे किसानों के बैंक खाते में जाएगी। राज्य अपने संसाधनों से यह पैसा देगा, ताकि त्योहार से पहले किसानों के हाथ में मदद पहुंच जाए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस अग्रिम भुगतान पर राज्य का अनुमानित खर्च करीब 6,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये हो सकता है। कितने किसानों को फायदा मिलेगा और कुल खर्च कितना होगा, यह पात्रता की शर्तें तय होने के बाद ही साफ होगा।

यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब महाराष्ट्र सरकार ने सूखाग्रस्त इलाकों की सूची बढ़ाकर 265 से 305 तालुका कर दी है। राज्य में कुल 358 तालुका हैं। शिकायतों की समीक्षा और जमीनी हालात का जायजा लेने के बाद सरकार ने 40 और तालुका इसमें जोड़े।

फडणवीस ने बताया कि सूखा राहत की सभी 12 मानक रियायतें इन 305 प्रभावित तालुकाओं में लागू होंगी। इनमें फसल कर्ज का पुनर्गठन, जमीन के राजस्व में छूट, बिजली बिल में सब्सिडी और किसानों के बच्चों की शिक्षा फीस में माफी शामिल है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक यह अग्रिम रकम इसलिए दी जा रही है कि केंद्र की जांच और राहत की प्रक्रिया चलने तक किसानों को तुरंत आर्थिक सहारा मिले। आगे राहत पैकेज और सरकारी दिशा-निर्देशों के हिसाब से किसान और मदद के हकदार होंगे।

सरकार ने जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों और सहकारी साख संस्थाओं को भी चेताया है कि वे कर्ज वसूली के लिए किसानों पर जबरदस्ती, परेशानी या बेवजह दबाव न डालें। निजी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से भी इन निर्देशों का पालन करवाने की कोशिश हो रही है।

पानी की कमी से निपटने के इंतजाम भी तेज किए गए हैं। फडणवीस ने कहा कि मराठवाड़ा में निगरानी कुओं का भूजल स्तर तीन मीटर से नीचे चला गया है, इसलिए सरकार टैंकर जल्दी लगाने की तैयारी कर रही है। टैंकरों पर जीपीएस से नजर रखी जाएगी।

पीने के पानी की हिफाजत के लिए राज्य ने करीब 16,000 अवैध नल कनेक्शन काट दिए हैं। सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग इलाकों में चारे का भंडार करीब 90 दिन से लेकर सात महीने तक चल सकता है, और जिन इलाकों में चारा उगाया गया है वहां से उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में कम बारिश की वजह से किसान खेती के संकट से जूझ रहे हैं। इस साल सरकार ने सूखा घोषित करने की प्रक्रिया पहले शुरू कर दी है। फडणवीस का कहना है कि हालात इतने गंभीर थे कि सूखा घोषणा और राहत के आम समय-सारणी से पहले कदम उठाना जरूरी था।

किसान संगठनों और विपक्षी नेताओं ने इस घोषणा की आलोचना की है। उनका सवाल है कि क्या 5,000 रुपये फसल के नुकसान और खेती की लागत की भरपाई के लिए काफी होंगे। सरकार का कहना है कि यह रकम फौरी अंतरिम मदद है, व्यापक सूखा राहत पैकेज का विकल्प नहीं।

सूखे के हालात बदलने के साथ राज्य से आगे की मदद के लिए जरूरी आकलन और कागजी कार्रवाई जारी रखने की उम्मीद है।

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