बदलापुर एमआईडीसी की केमिकल सीवेज लाइन फिर फटी, उल्हास नदी में घुला दूषित पानी
सोमवार को लाइन फटने से रासायनिक गंदा पानी सड़क, नाले और इमारतों की टंकियों तक पहुंचा। संभाजी शिंदे ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बदलापुर एमआईडीसी की रासायनिक गंदे पानी वाली लाइन एक बार फिर फट गई है। यह लाइन बदलापुर एमआईडीसी का केमिकल वाला गंदा पानी अंबरनाथ तक ले जाती है। सोमवार को लाइन फटते ही बड़ी मात्रा में रासायनिक गंदा पानी सड़क पर फैल गया और नाले में जा मिला।
बात यहीं नहीं रुकी। यही रासायनिक गंदा पानी कई इमारतों की पानी की टंकियों में भी घुस गया। नाले के रास्ते यह पानी उल्हास नदी तक पहुंचा और नदी के पानी में मिल गया, जिससे बड़े पैमाने पर जल प्रदूषण हुआ है। इस पर कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद की नियोजन और विकास समिति के सभापति संभाजी शिंदे ने तीखी नाराजगी जताई है। शिंदे भाजपा के पार्षद भी हैं।
शिंदे ने एमआईडीसी प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उन्हें डर है कि इस वजह से लोगों की सेहत का मसला खड़ा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि आगे ऐसा हुआ तो बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। साथ ही उन्होंने रासायनिक गंदे पानी की लाइन के काम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
बदलापुर में पिछले कुछ सालों से कुछ-कुछ महीनों के अंतर पर एमआईडीसी की यह लाइन फटती रही है। संभाजी शिंदे ने इस मुद्दे को लगातार उठाया था। उसके बाद एमआईडीसी प्रशासन ने भरोसा दिया था कि गंदे पानी की नई लाइन डाली जाएगी। उसी के मुताबिक रासायनिक गंदे पानी की नई लाइन डाली भी गई। इस काम पर करीब 128 करोड़ रुपये का खर्च हुआ। उम्मीद थी कि अब लाइन फटने का सिलसिला खत्म हो जाएगा, लेकिन सोमवार को लाइन फिर फट गई और रासायनिक गंदा पानी सड़क पर आ गया।
शिंदे के मुताबिक नई लाइन के वक्त उन्होंने मांग की थी कि स्टेनलेस स्टील की लाइन डाली जाए। पर एमआईडीसी प्रशासन ने एचडीपीई की लाइन डाली, और वही लाइन अब फट गई है। उनका कहना है कि करीब 128 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी गंदे पानी की लाइन फटी है।
इतना बड़ा खर्च होने के बाद भी लाइन बार-बार फट रही है। इसी वजह से काम की क्वालिटी, इस्तेमाल हुए मटेरियल और तकनीकी प्लानिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं। संभाजी शिंदे ने इन तीनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।