धाराशिव में खरीफ फसल बीमा के 4.79 लाख अर्ज, 2,507 करोड़ का बीमा कवर
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इस खरीफ सीजन धाराशिव जिले के किसानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया है। जिले से कुल 4 लाख 79 हजार 366 अर्ज दाखल हुए हैं। यह योजना इसलिए चलाई जाती है कि प्राकृतिक आपदा से फसल का नुकसान हो तो किसानों को आर्थिक सहारा मिले।
इन अर्जों के जरिए जिले की 4 लाख 7 हजार 230.50 हेक्टेयर जमीन को बीमा कवर मिला है। कुल बीमा संरक्षित रकम 2 हजार 507 करोड़ 40 लाख रुपये है। किसान, राज्य सरकार और केंद्र सरकार, तीनों का मिलाकर कुल 172 करोड़ 46 लाख रुपये का बीमा प्रीमियम तय हुआ है।
धाराशिव जिले की खेती ज्यादातर बारिश पर टिकी है। बारिश का बेतरतीब होना, अतिवृष्टि, बारिश में लंबा गैप और सूखा जैसी आफतों का सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। इसी वजह से फसल बीमा योजना की अहमियत बढ़ गई है। जिले के आठों तालुका के किसानों ने इसमें नाम दर्ज कराया है।
तालुका के हिसाब से देखें तो तुळजापूर में सबसे ज्यादा 86 हजार 670 अर्ज आए। वहां 94 हजार 749.10 हेक्टेयर को कवर मिला और संरक्षित रकम 588 करोड़ 34 लाख रुपये है। धाराशिव तालुका में 86 हजार 131 अर्ज के जरिए 82 हजार 861.06 हेक्टेयर को कवर मिला, रकम 516 करोड़ 17 लाख रुपये है।
कळंब तालुका में 76 हजार 872 अर्ज आए, 56 हजार 484.97 हेक्टेयर को कवर मिला और संरक्षित रकम 352 करोड़ 30 लाख रुपये है। उमरगा में 65 हजार 387 अर्ज दाखल हुए, 60 हजार 834.55 हेक्टेयर को कवर मिला और रकम 372 करोड़ 76 लाख रुपये है।
भूम तालुका में 62 हजार 323 अर्ज के जरिए 40 हजार 884.39 हेक्टेयर को कवर मिला, रकम 249 करोड़ 80 लाख रुपये है। वाशी में 42 हजार 367 अर्ज से 26 हजार 592.72 हेक्टेयर को कवर मिला, रकम 164 करोड़ 62 लाख रुपये है। लोहारा में 31 हजार 581 अर्ज आए, 30 हजार 182.69 हेक्टेयर को कवर मिला और रकम 185 करोड़ 76 लाख रुपये है। परंडा में 28 हजार 35 अर्ज के जरिए 14 हजार 640.98 हेक्टेयर को कवर मिला, रकम 77 करोड़ 67 लाख रुपये है।
जिले में सोयाबीन मुख्य खरीफ फसल है, इसलिए बीमा कवर का बड़ा हिस्सा उसी का है। सोयाबीन के लिए किसानों का 48 करोड़ 64 लाख रुपये, राज्य सरकार का 60 करोड़ 80 लाख रुपये और केंद्र सरकार का 60 करोड़ 80 लाख रुपये, यानी कुल 170 करोड़ 24 लाख रुपये का प्रीमियम दर्ज हुआ है।
दूसरी फसलों में उड़द, कपास, मूंग, मक्का, प्याज, बाजरा और तूअर शामिल हैं। उड़द के लिए 13 हजार 824, कपास के लिए 288, मूंग के लिए 4 हजार 256, मक्का के लिए 1 हजार 527, प्याज के लिए 3 हजार 544 और बाजरा के लिए 46 अर्ज आए हैं। तूअर के लिए 20 हजार 944 अर्ज हैं और 9 हजार 470.66 हेक्टेयर क्षेत्र दर्ज है।
जिले के कुल प्रीमियम में किसानों का हिस्सा 50 करोड़ 19 लाख रुपये है। राज्य सरकार का हिस्सा 61 करोड़ 13 लाख रुपये और केंद्र सरकार का भी 61 करोड़ 13 लाख रुपये है। तीनों को मिलाकर प्रीमियम 172 करोड़ 46 लाख रुपये होता है।
किसान बीज, खाद, जुताई और मजदूरी पर काफी खर्च करते हैं। प्राकृतिक आपदा से फसल खराब हो जाए तो उनकी आमदनी पर असर पड़ता है। ऐसे में फसल बीमा योजना आर्थिक जोखिम घटाने में काम आती है।
यह भी साफ किया गया है कि बीमा संरक्षित रकम और असल नुकसान भरपाई दो अलग चीजें हैं। संरक्षित रकम का मतलब यह नहीं कि किसानों को उतना पैसा बांट दिया गया। असल भरपाई योजना के प्रावधान, पात्रता की शर्तों और नुकसान के आकलन के हिसाब से तय होती है।
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