धाराशिव में मराठवाड़ा मुक्तिसंग्राम के 17 शहीदों का स्मृतिस्तंभ बुलडोजर से गिराया
धाराशिव नगरपालिका पर आरोप है कि उसने छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान में लगा स्मृतिस्तंभ बुलडोजर से तोड़ दिया। लोगों में गुस्सा है।
धाराशिव शहर में मराठवाड़ा मुक्तिसंग्राम के शहीदों की याद में बना एक स्मृतिस्तंभ बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया गया। यह काम धाराशिव नगरपालिका ने किया, ऐसा मामला सामने आया है। मराठवाड़ा को निजाम की गुलामी से आजाद कराने के लिए जिन लोगों ने अपनी जान दी, उनकी याद से यह स्तंभ जुड़ा था।
यह स्तंभ शहर के बीच के हिस्से में छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान में था। बताया गया है कि स्तंभ को पूरी तरह चूर-चूर कर दिया गया। इससे नागरिकों में तीखा गुस्सा है। नागरिक और शहीदों के रिश्तेदार मांग कर रहे हैं कि इस घटना के लिए जो अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो।
यह स्मृतिस्तंभ पहले शहर के पुराने पुलिस थाने के सामने था। कुछ साल पहले उसे छत्रपति संभाजी महाराज उद्यान में शिफ्ट किया गया था। मराठवाड़ा मुक्तिसंग्राम में प्राणों की आहुति देने वाले 17 शहीदों के नाम इस स्तंभ पर खुदे हुए थे। स्तंभ के पीछे की तरफ भारतीय संविधान की उद्देशिका खुदी थी। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रतीक सिंहचिन्ह और अशोकचक्र भी उस पर बने थे। इसलिए लोग इसे सिर्फ पत्थर और मिट्टी का ढांचा नहीं मानते थे। वे इसे मराठवाड़ा मुक्तिसंग्राम के इतिहास और शहीदों के बलिदान की याद संभालने वाली निशानी मानते थे।
नागरिकों का आरोप है कि इस ऐतिहासिक स्तंभ की देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासन की थी, लेकिन उस पर लगातार ध्यान नहीं दिया गया। सफाई, रंगाई-पुताई और आसपास की देखरेख प्रशासन से अपेक्षित थी। असल में यह काम स्थानीय नागरिक और शहीदों के रिश्तेदार खुद आगे आकर कर रहे थे। अलग-अलग राष्ट्रीय और ऐतिहासिक दिनों पर यहां शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी जाती थी।
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने नियमित देखभाल करने की जगह आखिर में उस पर बुलडोजर चला दिया, जिससे गुस्सा और बढ़ गया। नागरिकों की प्रतिक्रिया है कि जिन शहीदों के बलिदान से मराठवाड़ा को आजादी मिली, उनकी याद को संभाला नहीं जा सका, उलटे उनका स्मृतिस्तंभ ही जमींदोज कर दिया गया।
अब कई सवाल उठ रहे हैं। स्तंभ गिराने का फैसला आखिर किसने लिया, इसके लिए किसकी इजाजत ली गई, और गिराने से पहले शहीदों के रिश्तेदारों या संबंधित नागरिकों को बताया गया था या नहीं। साथ ही स्तंभ पर लिखे शहीदों के नामों, संविधान की उद्देशिका और राष्ट्रीय प्रतीकों का आगे क्या किया गया। मांग है कि प्रशासन इन बातों पर साफ रुख रखे।
नागरिक चाहते हैं कि मामले की जांच हो। स्तंभ गिराने का आदेश देने वाले अधिकारी, मौके पर कार्रवाई करने वाले कर्मचारी और फैसले की जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
नागरिकों का कहना है कि शहीदों की याद से जुड़ी जगहों को बचाने की जगह उनकी ऐसी हालत होना गंभीर प्रशासनिक सवाल है। इसलिए मांग जोर पकड़ रही है कि नगरपालिका प्रशासन सिर्फ सफाई देकर न रुके। वह जिम्मेदारी तय करे और स्मृतिस्तंभ को दोबारा खड़ा करने और ठीक तरह से संभालने पर ठोस फैसला ले।