बसवंतवाडी में जलयुक्त शिवार के तहत रिसाव तालाब का काम शुरू, प्रभारी सचिव डॉ. राजेश देशमुख मौजूद
तुलजापुर तहसील के बसवंतवाडी गांव की सीमा में 55 हेक्टेयर क्षेत्र में रिसाव तालाब बनेगा।
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धाराशिव, 19 अक्टूबर: तुलजापुर तहसील के बसवंतवाडी क्षेत्र में जलयुक्त शिवार अभियान के तहत रिसाव तालाब का काम शुरू हो गया है। इसका शुभारंभ 18 अक्टूबर को प्रभारी सचिव डॉ. राजेश देशमुख की मौजूदगी में हुआ। मकसद यह है कि बारिश की हर बूंद जमीन में उतरे, भूजल बढ़े और किसानों के खेतों में बारहमासी खेती की उम्मीद बने।
बारिश की अनियमितता से पानी की किल्लत, घटता भूजल स्तर और सिंचाई की कमी से किसान परेशान हैं। ऐसे में जलसंरक्षण के काम उनके लिए उम्मीद की नई किरण बन रहे हैं।
प्रभारी सचिव डॉ. देशमुख जिले में सूखे के हालात का जायजा लेने और फसलों के नुकसान को मौके पर देखने के लिए 18 अक्टूबर को दौरे पर आए थे। इसी दौरे में उनकी प्रमुख मौजूदगी में मृदा और जलसंरक्षण विभाग की ओर से यह काम शुरू किया गया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी कीर्ती किरण पुजार, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रियंवदा म्हाडदळकर, मृदा और जलसंरक्षण विभाग के कार्यकारी अभियंता विवेकानंद मगर, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी सागर खटकाळे, उपविभागीय अधिकारी ओंकार देशमुख, तहसीलदार अरविंद बोळंगे, उप अभियंता सायली जाधव, जीवन काकडे, ग्राम सेवक श्रीमती खोपडे, कृषि सहायक श्री. होळकर और किसान ज्ञानेश्वर पारवे और नरसो पारवे मौजूद थे।
यह रिसाव तालाब बसवंतवाडी क्षेत्र में 55 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगा। बारिश में बहकर निकल जाने वाला पानी इससे रुकेगा और जमीन में रिसेगा। नतीजा यह कि इलाके का भूजल स्तर बढ़ने में मदद मिलेगी और खेती के लिए पानी मिल पाएगा। रिसाव तालाब की खासियत है कि जमा किया पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे जमीन के नीचे का जलभंडार फिर भरता है। इसका अच्छा असर आसपास के कुओं और बोरवेल के जलस्तर पर पड़ सकता है। जहां बारिश कम होती है और बार-बार सूखे का सामना करना पड़ता है, वहां ऐसे प्रोजेक्ट खास मायने रखते हैं।
बारिश पर टिकी खेती में बारिश खिंच जाए तो फसल की बढ़त रुकती है, पैदावार घटती है और किसानों को माली नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में रिसाव तालाब जैसे काम खेती को बड़ा सहारा दे सकते हैं। भूजल रीचार्ज होने से सिंचाई की उपलब्धता सुधरेगी और फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी देना आसान होगा। संरक्षित सिंचाई की सुविधा मिले तो फसलों का संभावित नुकसान कम हो सकता है, पैदावार बढ़ सकती है और खेती ज्यादा टिकाऊ बन सकती है। पानी बढ़ने पर किसान खरीफ के साथ रबी सीजन की फसलों की योजना भी बना सकते हैं।
रिसाव तालाब सिर्फ पानी जमा करने का जरिया नहीं, बल्कि भूजल रीचार्ज के लिए काम आने वाला जलसंरक्षण ढांचा है। तालाब के आसपास के कुओं, बोरवेल और दूसरे जलस्रोतों को इसका फायदा मिल सकता है। भूजल स्तर सुधरे तो गर्मियों में पैदा होने वाली पानी की किल्लत की तीव्रता भी घट सकती है।
जिले में सूखे के हालात को देखते हुए पानी रोकना, पानी जमीन में उतारना और मौजूद जलस्रोतों को बचाना बेहद जरूरी हो गया है। जलयुक्त शिवार अभियान के तहत बसवंतवाडी में शुरू हुआ यह तालाब आगे की पानी की किल्लत घटाने और खेती को मजबूत बनाने में अहम साबित होगा। किसान के लिए खेत में पानी का होना सिर्फ फसल को जीवनदान नहीं, परिवार की आर्थिक स्थिरता का आधार भी है। इसी वजह से जलसंरक्षण के कामों को लंबे समय का उपाय माना जाता है।