सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 10:20 IST

पेंच के दो हाथी भीमा और सुब्रमण्यम सीखेंगे जंगली हाथियों को काबू करना

कर्नाटक के विशेषज्ञ पेंच पहुंचकर देंगे ट्रेनिंग, विदर्भ में हाथियों के हमले रोकने की तैयारी।

पेंच के दो हाथी भीमा और सुब्रमण्यम सीखेंगे जंगली हाथियों को काबू करना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

विदर्भ में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। इसी सिलसिले में पेंच टाइगर रिजर्व के दो पालतू एशियाई नर हाथियों को जंगली हाथियों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली में एलिफेंट कैंप बनाया गया था। वहां 'भीमा' और 'सुब्रमण्यम' नाम के हाथी रखे गए हैं, ताकि मानव-हाथी संघर्ष रोकने और रेस्क्यू ऑपरेशन में उनकी मदद ली जा सके। भीमा की उम्र 55 साल है और सुब्रमण्यम 27 साल का है। वन विभाग दोनों को खास ट्रेनिंग दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।

सूत्रों ने बताया कि कर्नाटक से विशेषज्ञों की एक टीम पेंच आएगी और भीमा व सुब्रमण्यम को ट्रेनिंग देगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद गड़चिरोली, गोंदिया और चंद्रपुर समेत विदर्भ के दूसरे जिलों में जंगली हाथियों के हमले रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। प्रभावित इलाकों में इन्हें जंगली हाथियों को काबू करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

भीमा और सुब्रमण्यम को साल 2023 में कर्नाटक से लाया गया था। दोनों हाथियों को कैप्चर तो महाराष्ट्र में ही किया गया था, लेकिन पक्की जगह न होने की वजह से उन्हें कर्नाटक भेज दिया गया था।

वन अधिकारियों ने बताया कि जंगली हाथियों को काबू करने के लिए हाथियों की ट्रेनिंग के साथ महावत की सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। जंगली हाथी काफी हद तक आक्रामक होते हैं। उन्हें शांत करते वक्त कोई अनहोनी हो जाए तो महावत की जान खतरे में पड़ सकती है। इसीलिए इन हाथियों का पूरी तरह ट्रेंड होना जरूरी है।

पिछले कुछ सालों से विदर्भ में जंगली हाथियों का झुंड फसलों और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा रहा है। करीब 3 साल पहले छत्तीसगढ़ से विदर्भ में आया झुंड पहले गोंदिया में रुका। फिर वह गड़चिरोली होते हुए तेलंगाना पहुंचा। यह झुंड लगातार महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच आता-जाता रहा है। इससे निपटने के लिए वन विभाग व्यापक प्रबंधन और नियंत्रण योजना तैयार कर रहा है। अब तक इन हाथियों का इस्तेमाल पेंच और आसपास के बाघ अभयारण्यों में बाघों के रेस्क्यू अभियान में होता रहा है।

ऐसे प्रशिक्षित हाथी कुमकी हाथी कहलाते हैं। जब कोई जंगली हाथी हिंसक हो जाता है या बस्तियों में घुसकर उत्पात मचाता है, तब कुमकी हाथियों की मदद ली जाती है। घने जंगलों या दुर्गम इलाकों में, जहां गाड़ी नहीं पहुंच सकती, वन विभाग इनकी मदद से जंगली हाथी को बेहोशी का इंजेक्शन (डार्ट) लगाता है। ये अपनी ताकत और शांत स्वभाव से जंगली हाथियों को रास्ता दिखाते हैं या उन्हें वापस जंगल की तरफ खदेड़ते हैं।

घायल, बीमार या दलदल में फंसे जंगली हाथी का पता लगाने, उसे बचाने और उसके इलाज में भी इनसे मदद मिलती है। इन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि तनाव और खतरे की हालत में भी ये घबराएं नहीं और सिर्फ अपने महावत का हुक्म मानें।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे