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धाराशिव: भगर खाकर 25 लोग बीमार, FDA की टीम को दुकान ही नहीं मिली

उपवास में भगर खाने के बाद 25 लोगों को विषबाधा हुई, लेकिन अन्न व औषध प्रशासन की टीम बेंबळी में उस दुकान का पता नहीं लगा सकी जहां से भगर खरीदी गई थी।

धाराशिव: भगर खाकर 25 लोग बीमार, FDA की टीम को दुकान ही नहीं मिली तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

धाराशिव तालुका में उपवास के दिन फराहार के लिए भगर खाने के बाद 25 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। यह घटना दो दिन पहले की है। इसके बावजूद अन्न और औषध प्रशासन (एफडीए) अब तक यह पता नहीं लगा पाया है कि यह भगर आखिर किस दुकान से खरीदी गई थी।

घटना की जांच के लिए एफडीए की टीम गुरुवार को बेंबळी गई थी। लेकिन टीम को वह दुकान ही नहीं मिली, इसलिए उसे बिना जांच किए वापस लौटना पड़ा। दुकान की तलाशी नहीं हो सकी और भगर के नमूने भी नहीं लिए जा सके।

लोगों को पेट में दर्द और विषाक्तता जैसे लक्षण महसूस होने लगे थे। इसके बाद कुछ लोगों को धाराशिव के जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, जबकि कुछ को बेंबळी के ग्रामीण अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। एक साथ इतने लोगों के बीमार पड़ने से मामला और गंभीर हो गया था।

भगर उपवास के फराहार का अहम हिस्सा है, इसलिए उसकी क्वालिटी और सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। जांच में यह जानना जरूरी था कि भगर कहां से खरीदी गई, उसकी एक्सपायरी क्या थी, उसे कैसे रखा गया और उसके उत्पादन की जानकारी क्या थी। उसके बाद दोषियों पर कार्रवाई होनी थी। लेकिन विक्रेता का पता न चलने से जांच के अगले कदम अटक गए हैं।

टीम से उम्मीद थी कि वह विषाक्तता के शिकार लोगों से खरीद की जानकारी लेगी, दुकान की जांच करेगी, भगर के नमूने कब्जे में लेगी और देखेगी कि अन्न सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। पर टीम यह जानकारी हासिल नहीं कर सकी कि लोगों ने भगर किस दुकान से ली थी। इसी वजह से अन्न सुरक्षा विभाग की जांच में रुकावट आ गई है।

अन्न सुरक्षा विभाग ने आरोप लगाया है कि बेंबळी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी और दूसरे कर्मचारियों ने एफडीए की टीम को सहयोग नहीं किया। विभाग के मुताबिक मरीजों की उपलब्ध जानकारी, घटना का ब्योरा और भगर खरीदने की जगह का पता लगाने में स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र की मदद अहम हो सकती थी।

अन्न सुरक्षा अधिकारी गणेश दत्तू ने बताया कि सहयोग न मिलने की वजह से जांच के लिए आई टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। स्वास्थ्य तंत्र और अन्न सुरक्षा विभाग के बीच तालमेल की कमी हो तो ऐसे मामलों की जांच पर असर पड़ सकता है। अब सवाल उठ रहा है कि कर्मचारियों ने सहयोग क्यों नहीं किया, इसकी भी जांच होगी या नहीं।

25 लोगों की तबीयत बिगड़ने के पीछे भगर ही वजह थी या नहीं, भगर में कोई दूषित चीज थी या नहीं और उसे सही तरीके से रखा गया था या नहीं, इसकी पक्की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसके लिए भगर के नमूनों की जांच और बिक्री की जगह का पता लगाना जरूरी है। दुकान न मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी है।

अब देखना होगा कि एफडीए दुकान ढूंढकर भगर के नमूनों की जांच करेगा या नहीं, और जांच में रुकावट के आरोप पर क्या कदम उठाएगा। लोगों की सेहत से जुड़े इस मामले में सिर्फ टीम भेजकर औपचारिकता पूरी करना काफी नहीं है। विषाक्तता की असली वजह खोजकर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

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