चंद्रपुर की सभी 15 तहसीलों में सूखा, पालकमंत्री उईके बोले: मिलकर करें मुकाबला, पानी में 10% कटौती आज से
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कम बारिश के कारण चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हैं। नियोजन भवन की समीक्षा बैठक में पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने पानी, चारे और किसानों की मदद पर निर्देश दिए।
चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है। इसी हालात पर आदिवासी विकास मंत्री और जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने नियोजन भवन में समीक्षा बैठक ली और अफसरों को साफ कहा कि राहत के काम में कोई ढील नहीं चलेगी। उन्होंने सबसे अपील की कि सरकार के फैसलों पर ठीक से अमल हो और सब लोग मिलकर इस संकट से निपटें।
डॉ. उईके ने बताया कि इस बार बारिश कम हुई और बीच में लंबे समय तक पानी गिरा ही नहीं, इसलिए सिर्फ चंद्रपुर नहीं, पूरे महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। उनके मुताबिक मुश्किल की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और सूखे से निपटने के लिए सरकार कई बड़े फैसले ले चुकी है।
बैठक में सांसद नामदेव किरसान, विधायक किशोर जोरगेवार, देवराव भोंगळे और करण देवतळे हाजिर थे। जिलाधिकारी वसुमना पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, महानगरपालिका आयुक्त अकुनुरी नरेश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे समेत कई विभागों के अफसर भी मौजूद रहे। सांसद और विधायकों ने भी सूखे से निपटने के लिए अपने सुझाव सामने रखे।
पालकमंत्री ने कहा कि पूरी सरकारी मशीनरी 'अलर्ट मोड' में रहे। पानी को लेकर उनका जोर इस बात पर था कि बिजली कनेक्शन न होने या किसी तकनीकी वजह से कहीं भी पानी की सप्लाई रुकने की शिकायत नहीं आनी चाहिए। अगर पानी सप्लाई वाली योजनाओं की बिजली काटी गई, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी, यह चेतावनी भी उन्होंने दी।
कारखानों और उद्योगों के लिए भी उन्होंने दो निर्देश दिए। पहला, उनका CSR फंड सबसे पहले पानी की किल्लत दूर करने के काम में लगाया जाए। दूसरा, राज्य सरकार के आदेश के हिसाब से उद्योगों को मिलने वाले पानी में आज से ही 10 प्रतिशत की कटौती कर दी जाए।
डॉ. उईके ने कहा कि जून-जुलाई तक लोगों को बिना किसी रुकावट के पीने का पानी मिलता रहे, इसके लिए महानगरपालिका अभी से पक्का इंतजाम करे। किसानों के मामले में उन्होंने चेताया कि सूखे के वक्त अगर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज वसूलने के लिए किसानों पर दबाव डालें या जबरदस्ती करें, तो उन कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पानी की संभावित कमी और जानवरों के चारे जैसे सवालों पर सारे विभाग आपस में तालमेल बनाकर बारीकी से योजना बनाएं, ताकि लोगों को वक्त पर राहत मिले।
बैठक में जिलाधिकारी वसुमना पंत ने प्रेजेंटेशन देकर जिले की तस्वीर रखी। उनके अनुसार सूखे की मार जिले के कुल 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर इलाके पर पड़ी है। इसके बदले मदद के लिए शासन को 316 करोड़ 95 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। दिवाली सामने है, इसलिए प्रभावित किसानों को हर किसान के हिसाब से 5 हजार रुपये की अग्रिम रकम बांटने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
पंत ने आगे बताया कि इस साल 15 तहसीलों के 56 हजार 988 किसानों को जमीन राजस्व में छूट मिली है, जो कुल 2 लाख 43 हजार 670 रुपये की है। किसानों के चालू फसल कर्ज को आसान किस्तों में बदलने का काम जारी है। खेती से जुड़े तमाम कर्जों की वसूली पर फिलहाल जिले में रोक लगा दी गई है।
बिजली के मोर्चे पर खेती के पंपों के चालू बिल में रियायत दी जा रही है। जिन तहसीलों में किल्लत घोषित हुई है, वहां किसानों के पंपों की बिजली किसी भी हाल में न काटने के साफ निर्देश दिए जा चुके हैं।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि जमीन के नीचे पानी का स्तर ऊपर लाने के लिए जल संरक्षण के नए काम फौरन शुरू कर दिए गए हैं। मवेशियों के लिए चारा छावनियां (शिविर) खोलने की योजना बन रही है और चारा लगातार मिलता रहे, इसके इंतजाम भी हो रहे हैं। गांवों से मजदूरों को शहरों की तरफ पलायन न करना पड़े, इसलिए रोजगार गारंटी योजना (रोगायो) के तहत अलग-अलग काम दिए जा रहे हैं।
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