शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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सूखे वाले 304 तालुकों में तालाबों की गाद वाली जमीन पर किसान उगा सकेंगे चारा

सूखे वाले 304 तालुकों में तालाबों की गाद वाली जमीन पर किसान उगा सकेंगे चारा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

मृदा और जल संरक्षण विभाग के जलाशय और तालाबों की गाद वाली जमीन किसानों और पशुपालकों को किराए पर मिलेगी। पीने के पानी का आरक्षण सबसे पहले रहेगा।

राज्य सरकार ने सूखा घोषित किए गए 304 तालुकों में जलाशयों और तालाबों की गालपेरा जमीन किसानों और पशुपालकों को किराए पर देने का फैसला किया है। यह जमीन मृदा और जल संरक्षण विभाग के अधीन आती है और कम समय में तैयार होने वाली चारा फसलों के लिए दी जाएगी। इसमें मक्का, ज्वार, बाजरा, न्यूट्रीफीड, बरसीम और ओट जैसी फसलें ली जा सकेंगी। मृदा और जल संरक्षण मंत्री संजय राठोड ने यह जानकारी दी। इस बारे में सरकारी आदेश जारी हो चुका है।

राठोड ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 में बारिश की कमी और दूसरे कारणों को देखकर राज्य के 304 तालुके सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं। इन इलाकों में जानवरों को चारा मिल सके, इसके लिए मृदा और जल संरक्षण विभाग ने 5 नवंबर 2026 को तकनीकी मार्गदर्शक निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश लघु सिंचाई तालाब, भंडारण तालाब, रिसाव तालाब, गांव तालाब और पूर्व मालगुज़ारी तालाब पर लागू रहेंगे। जिन जलाशयों का पानी पानी सप्लाई योजनाओं के लिए रिजर्व है या टैंकर भरने के काम आता है, वहां पीने के पानी के आरक्षण को सबसे पहले रखा जाएगा। जहां मरम्मत, सिल्ट निकालने या पुनर्स्थापना का काम चल रहा है या प्रस्तावित है, वह क्षेत्र गालपेरा खेती के लिए नहीं दिया जाएगा।

जलाशय की पूरी भराव सतह और असल पानी के स्तर के बीच जो खेती लायक जमीन खुली पड़ी है, वही गालपेरा क्षेत्र मानी जाएगी। बांध की मिट्टी की दीवार के जलाशय की तरफ वाले तल से कम से कम 50 मीटर, स्पिलवे और उसके प्रवेश रास्ते से कम से कम 30 मीटर, और विमोचक, इनटेक कुआं, जैकवेल, गेज पोल और बेंचमार्क के आसपास कम से कम 30 मीटर का इलाका प्रतिबंधित रहेगा। पीने के पानी के उद्भव कुएं या जैकवेल के 200 मीटर के दायरे में रासायनिक खाद और कीटनाशक वाली खेती की इजाजत नहीं मिलेगी।

प्रक्रिया यह है कि राजस्व, कृषि, पशुपालन और मृदा और जल संरक्षण विभाग के अधिकारी मिलकर सर्वे करेंगे और गालपेरा उपलब्धता रिपोर्ट तैयार करेंगे। संबंधित कार्यकारी अभियंता यह रिपोर्ट सरकारी आदेश की तारीख से 15 दिन के अंदर जिला स्तरीय समिति को देंगे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली यह समिति प्रोजेक्ट के हिसाब से उपलब्ध क्षेत्र देखेगी, बंटवारे को मंजूरी देगी, लाभार्थी चुनेगी और हर लाभार्थी के लिए क्षेत्र की ऊपरी सीमा तय करेगी।

चारा फसलें ज्यादातर जमीन में मौजूद नमी पर लेनी होंगी। पीने के लिए और पशुधन के लिए जरूरी पानी रिजर्व करने के बाद अगर पानी बचता है, तभी कार्यकारी अभियंता की लिखित इजाजत से संरक्षित सिंचाई की जा सकेगी, जिसमें ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई को तरजीह रहेगी। जलाशय का पानी मृत भंडार तक या पीने के लिए रिजर्व स्तर तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सिंचाई के लिए पानी उठाने की इजाजत नहीं होगी।

साइलेज के लिए गालपेरा क्षेत्र में मक्का और ज्वार को प्राथमिकता दी गई है। गन्ना, फलों की फसलें, कई साल चलने वाली फसलें, अनाज या नकदी फसलें नहीं ली जा सकेंगी। लाभार्थियों को कटाई पूरी करके 31 मई 2027 से पहले जमीन विभाग को वापस सौंपनी होगी। पानी का स्तर बढ़ने से खड़ी फसल डूब गई तो नुकसान भरपाई नहीं मिलेगी। जमीन की जुताई ज्यादा से ज्यादा 20 सेंटीमीटर गहराई तक की जा सकेगी। सिल्ट, मिट्टी, मुरम या रेत की खुदाई और ढुलाई, नया कुआं, बोरवेल, खेत तालाब, गड्ढे या नाली खोदना, निर्माण, बाड़, सड़क, झोपड़ी या पेड़ लगाना मना रहेगा। बांध की दीवार पर ट्रैक्टर या भारी गाड़ियां चलाना और फसल के अवशेष जलाना भी मना है। राठोड ने बताया कि शर्तें तोड़ी गईं तो कार्यकारी अभियंता इजाजत तुरंत रद्द कर देंगे और ढांचे या जलाशय को हुए नुकसान का खर्च संबंधित लाभार्थी से वसूला जाएगा।

तहसीलदार उपलब्ध क्षेत्र, किराए की अवधि, किराया दर और आवेदन के लिए कम से कम 15 दिन की मियाद गांव की चौपाल, ग्राम पंचायत, तहसील दफ्तर में और मुनादी के जरिए प्रसिद्ध करेंगे। मंत्री संजय राठोड ने अपील की है कि इच्छुक लोग या सहकारी संस्थाएं निवासी प्रमाणपत्र, जमीन धारण के अभिलेख या भूमिहीन प्रमाणपत्र के साथ आवेदन करें। लागू हो तो जाति, परियोजना प्रभावित, संस्था पंजीकरण और पशुधन से जुड़े कागजात भी लगाएं। आवेदन संबंधित तहसीलदार के पास जमा करना है।

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