वाई में सूखे का खतरा, सिंचाई विभाग की नहरों से पानी रिस रहा, मरम्मत कब होगी?
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वाई परिसर में सूखे का साया गहरा रहा है और सिंचाई विभाग की नहरों से बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव हो रहा है। नागरिक पूछ रहे हैं कि मरम्मत का काम कहां है।
वाई परिसर में सूखे का साया गहराता जा रहा है। ऐसे में जो पानी उपलब्ध है, उसका ठीक से इंतजाम करना जरूरी हो गया है। लेकिन सिंचाई विभाग की नहरों से बड़े पैमाने पर पानी रिस रहा है, जिससे जल संपदा बर्बाद हो रही है। यह मुद्दा अब सामने आया है।
एक तरफ नागरिकों और किसानों से पानी संभालकर इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। दूसरी तरफ नहरों की देखभाल और मरम्मत को लेकर इतनी उदासीनता क्यों है, यह सवाल उठ रहा है।
वाई परिसर में सिंचाई विभाग की नहरों से रिसने वाला पानी धाराओं और नालों में बह जाता है। इससे उपलब्ध जल भंडार का नुकसान हो रहा है। बांधों के पानी का इंतजाम करते समय पीने के पानी, खेती और बाकी जरूरतों को पहले रखना पड़ता है। ऐसे हालात में वितरण व्यवस्था का रिसाव रोकना अहम है।
नहरों की खराब हालत देखकर नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या नियमित देखभाल और मरम्मत का काम वाकई होता है। मांग है कि रिसाव की जगहें तय करके उन पर तुरंत उपाय किए जाएं। लोगों को यह भी उम्मीद है कि विभाग बताए कि पिछले एक साल में नहरों की मरम्मत पर कितनी निधि खर्च हुई और कौन से काम पूरे किए गए।
नहरों के आसपास कुछ ईंट भट्टों में पानी इस्तेमाल होने की चर्चा नागरिकों में है। मांग उठी है कि जांच हो कि इन कारोबारियों को पानी किन स्रोतों से मिलता है, क्या इसके लिए आधिकारिक इजाजत ली गई है और क्या पानी मंजूर सीमा के अंदर ही लिया जा रहा है। पानी की किल्लत की आशंका के बीच अगर गैरकानूनी तरीके से पानी खींचा जा रहा है, तो उस पर काबू पाना जरूरी है।
साथ ही नागरिक कह रहे हैं कि सिर्फ चर्चा के आधार पर किसी को दोषी न ठहराया जाए। सिंचाई विभाग खुद जांच करके सच्चाई साफ करे। अगर गैरकानूनी पानी का इस्तेमाल मिले, तो जिम्मेदार लोगों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई हो, यह मांग नागरिक कर रहे हैं।
नागरिकों की मांग है कि सिंचाई विभाग नहरों का मौके पर जाकर मुआयना करे, रिसाव की जगहें दर्ज करे और तय करे कि कितना पानी बर्बाद होता है। इसके बाद मरम्मत का समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर जरूरी काम पूरे किए जाएं। नियमित मुआयने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर है, उनसे रिपोर्ट लेकर कमियों पर कार्रवाई हो। पानी के इस्तेमाल की आधिकारिक इजाजतों की जांच करके गैरकानूनी तरीके से पानी निकालने पर भी रोक लगाई जाए।
आखिरी छोर के किसानों तक पूरा पानी पहुंचे, इसके लिए वितरण व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। सूखे के बीच हर बूंद बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ नागरिकों की नहीं, सरकारी तंत्र की भी है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि पानी बचाने की अपील के साथ सिंचाई विभाग नहरों का रिसाव रोकने के लिए असल में कार्रवाई कब करेगा।
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