सूखे के हालात का मिलकर मुकाबला करें: प्रभारी मंत्री डॉ. उईके
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चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हुई हैं। नियोजन भवन की बैठक में डॉ. अशोक उईके ने सरकारी उपायों पर असरदार अमल की अपील की।
कम बारिश और बारिश में पड़े लंबे ब्रेक की वजह से राज्य में सूखे के हालात बने हैं। चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हो गई हैं। इस मुश्किल घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। सूखे से निपटने के लिए सरकार ने कई नीतिगत फैसले लिए हैं। इन उपायों पर असरदार अमल करके सब मिलकर सूखे का मुकाबला करें, यह अपील राज्य के आदिवासी विकास मंत्री और चंद्रपुर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. अशोक उईके ने की।
डॉ. उईके नियोजन भवन में सूखा निवारण को लेकर बुलाई गई बैठक में बोल रहे थे। सांसद नामदेव किरसान, विधायक किशोर जोरगेवार, देवराव भोंगळे, करण देवतळे, जिलाधिकारी वसुमना पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, महानगरपालिका आयुक्त अकुनुरी नरेश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे समेत कई लोग मौजूद थे।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि पूरा तंत्र अलर्ट मोड पर रहकर काम करे। बिजली कनेक्शन की वजह से पानी की सप्लाई ठप हुई, ऐसी शिकायत नहीं आनी चाहिए। पानी सप्लाई योजनाओं का बिजली कनेक्शन काटा गया तो सख्त कार्रवाई की जाए। उद्योगों का सीएसआर फंड पानी की किल्लत दूर करने में लगे। राज्य सरकार ने पानी में कटौती के निर्देश दिए हैं, इसलिए उद्योगों को दिए जाने वाले पानी में आज से ही 10 प्रतिशत कटौती की जाए।
उन्होंने कहा कि जून-जुलाई तक लोगों को पीने का पानी मिले, इसके लिए महानगरपालिका भी अभी से ठीक प्लानिंग करे। सूखे में अगर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान करें, तो ऐसी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो। संभावित पानी की किल्लत और मवेशियों के चारे जैसे मुद्दों पर बारीकी से प्लानिंग कर, लोगों को राहत देने के लिए सभी विभाग तालमेल से काम करें। सांसद और विधायकों ने भी सुझाव दिए।
प्रेजेंटेशन में जिलाधिकारी वसुमना पंत ने बताया कि सूखे से जिले में कुल 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित है। सरकार को 316 करोड़ 95 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। दिवाली को देखते हुए प्रभावित किसानों को 5 हजार रुपये की अग्रिम रकम बांटने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इस साल 15 तहसीलों के 56 हजार 988 किसानों को 2 लाख 43 हजार 670 रुपये की जमीन राजस्व में छूट दी गई है। किसानों के चालू फसल कर्ज को आसान किस्तों में बदलने की प्रक्रिया जारी है। खेती से जुड़े सभी कर्जों की वसूली पर जिले में रोक लगा दी गई है।
खेती के पंपों के चालू बिजली बिल में रियायत लागू की गई है। जिन तहसीलों में किल्लत घोषित हुई है, वहां खेती के पंपों की बिजली न काटने के निर्देश दिए गए हैं। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जल संरक्षण के नए काम तुरंत हाथ में लिए गए हैं। मवेशियों के लिए चारा छावनियों की प्लानिंग और चारा मिलता रहे, इसके उपाय किए जा रहे हैं। मजदूरों का पलायन रोकने के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत काम दिए जा रहे हैं।
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