नागपुर में गुरुवार शाम रैली से शहर ठप, घंटों जाम में फंसे लोग और बाजार सूने
गुरुवार शाम की रैली से वर्धा रोड, धंतोली, मेडिकल चौक, महल और सेंट्रल एवेन्यू तक वाहन रेंगते रहे। एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिला और त्योहारी खरीदारी पर असर पड़ा।
गुरुवार की शाम नागपुर में निकली एक रैली ने पूरे शहर की रफ्तार रोक दी। रैली किसकी थी और किसलिए निकाली गई, इस पर यहां कुछ नहीं कहा जा रहा। बात सिर्फ इतनी है कि उसने शहर को एक तरह से 'चोक' कर दिया। त्योहार के वक्त रैली और आंदोलन को लेकर देश में पहले से बहस छिड़ी हुई है, और उसी बीच यह रैली निकली।
शाम ढलते ही शहर की चाल धीमी पड़ने लगी और यह हाल देर रात तक बना रहा। वर्धा रोड पर कृपलानी चौक से जाम शुरू हुआ और छत्रपति चौक तक उसका असर रहा। वाहन रेंगते रहे। एयरपोर्ट जाने वालों को भी पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
असर सिर्फ वर्धा रोड तक नहीं रहा। अजनी स्टेशन, मोक्ष वाम, घाट रोड, मेडिकल चौक, अशोक चौक, महल और सेंट्रल एवेन्यू तक जाम की मार दिखी। धंतोली में मरीजों को आने-जाने में बड़ी दिक्कत हुई। वहां आने वाले वाहन हर गली में रेंग रहे थे। गलियों से लेकर मुख्य मार्ग तक इतनी गाड़ियां फंसी थीं कि एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
धंतोली से निकलकर लोगों ने दीक्षाभूमि रोड और लक्ष्मीनगर चौक की तरफ जाने की कोशिश की, पर इन रास्तों पर भी राहत नहीं मिली। वीआईपी रोड से दीक्षाभूमि चौक तक लोग फंसे रहे। आठ रास्ता चौक से लगभग शंकरनगर चौक तक वाहनों की रफ्तार थमी-सी रही।
इन रास्तों पर ट्रैफिक का हाल बुरा था, मगर ट्रैफिक पुलिस के जवान कहीं नजर नहीं आए। जाम खुलवाने की सारी कोशिशें नाकाम दिखीं। पुलिस आयुक्त ने एक दिन पहले खुद कमान संभाली थी और सबको मुस्तैदी से काम करने को कहा था, लेकिन भीड़ के आगे पुलिस का बंदोबस्त बिखरता दिखा। लोगों को फंसने के लिए छोड़ दिया गया।
जाम की एक वजह निर्माण कार्य भी रहे। कई इलाकों में काम की तय अवधि खत्म होने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए हैं, और इसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। कहीं रोड ब्लॉक है तो कहीं डायवर्जन है, जिसकी वजह से लोग इधर-उधर फंसने को मजबूर हैं।
रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल थे। कुछ व्यापारिक संगठनों ने उनके स्वागत के लिए मंच सजाए थे। दूसरी तरफ त्योहारी ग्राहकी की आस में बैठे व्यापारी ग्राहक न पहुंचने से परेशान थे। उनका कहना था कि हम दिल्ली की बात करते हैं, पर अपने ही शहर में रैली निकालकर परेशान किया जा रहा है।
व्यापारियों का यह भी कहना था कि ऐन त्योहार पर इस तरह की रैली नहीं होनी चाहिए। पूरा बाजार चौपट हो गया। उन्होंने पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन ग्राहक पहुंच ही नहीं पाए। वाहनों में फंसे लोग इतने तंग आ चुके थे कि उन्होंने लौट जाना ही बेहतर समझा।
सवाल यह भी उठ रहा है कि दिल्ली में रैली से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होता है और व्यापारी दूर-दूर तक उसकी शिकायत करते रहे हैं, तो नागपुर में इस रैली का विरोध क्यों नहीं हुआ।
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