शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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पीने के पानी और सिंचाई को प्राथमिकता, जलाशयों के पानी का नियोजन करने के पालकमंत्री के निर्देश

पीने के पानी और सिंचाई को प्राथमिकता, जलाशयों के पानी का नियोजन करने के पालकमंत्री के निर्देश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

गोंदिया जिले में सूखे जैसे हालात को देखते हुए पालकमंत्री इंद्रनील नाईक ने सभी जलाशयों और बांधों के पानी का इस्तेमाल सबकी सहमति से और तय प्राथमिकता के हिसाब से करने को कहा।

गोंदिया, 6 तारीख: जिले में इस साल सूखे जैसे हालात बने हैं और आने वाली गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। इसे देखते हुए पालकमंत्री इंद्रनील नाईक ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निर्देश दिए कि जिले के सभी जलाशयों और बांधों के पानी का इस्तेमाल सबकी सहमति से और तय प्राथमिकता के हिसाब से प्लानिंग करके किया जाए। पीने के पानी के साथ खेती के लिए जरूरी पानी भी बना रहे और कहीं पानी बर्बाद न हो, इसका ध्यान रखा जाए।

जिलाधिकारी कार्यालय में जलाशय पानी आरक्षण निर्धारण समिति की बैठक हुई, जिसमें पालकमंत्री नाईक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े। बैठक में विधायक राजकुमार बडोले, विनोद अग्रवाल और संजय पुराम, जिलाधिकारी मंदार पत्की, कार्यकारी अभियंता सोनाली सोनुले, इटियाडोह सिंचाई विभाग के रा.गो. कुरेकार, मध्यम परियोजना विभाग के व्ही. आर. पवार, तिरोडा के धापेवाडा लिफ्ट सिंचाई विभाग के व्ही. मटकावार, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के श्री गणवीर, जिला परिषद के ग्रामीण पानी आपूर्ति विभाग के श्री वानखेडे, गोंठणगांव की इटियाडोह परियोजना समिति पानी वितरण संस्था के अध्यक्ष श्री पालीवाल और देवरी नगर पंचायत की मुख्य अधिकारी करिश्मा वैद्य मौजूद थे।

बैठक में बाघ, इटियाडोह, गोंदिया सिंचाई विभाग, मध्यम परियोजना और लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के पानी, उसके आरक्षण और आगे के इस्तेमाल पर विस्तार से बात हुई। कार्यकारी अभियंता सोनाली सोनुले ने प्रेजेंटेशन देकर बड़ी बाघ और इटियाडोह परियोजनाओं की जानकारी रखी।

बाघ परियोजना में शिरपूर भंडारण बांध, पुजारीटोला डायवर्जन बांध और कालीसरार बांध आते हैं। इनके पानी का इस्तेमाल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की संयुक्त व्यवस्था के तहत होता है। इटियाडोह परियोजना अर्जुनी मोरगाव तहसील में गाढवी नदी पर बनी है और इसका दायरा गोंदिया, भंडारा और गडचिरोली जिलों तक है।

अभी बड़े बांधों में पीने के लिए काफी पानी है, लेकिन गर्मी में सूखे की तीव्रता बढ़ने की आशंका है, इसलिए पानी का सख्त नियोजन जरूरी है। पालकमंत्री ने सरकार के 5 अक्टूबर 2026 के निर्णय के मुताबिक जरूरी पानी आरक्षित रखने की भी सूचना दी। उन्होंने कहा कि खेती के लिए पानी देते वक्त कम पानी वाली रबी की फसलों को प्राथमिकता देने के बारे में किसानों में जागरूकता लाई जाए और कृषि विभाग यह जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाने के लिए आगे आए।

गोंदिया सिंचाई विभाग के तहत सात मध्यम परियोजनाएं, 20 लघु परियोजनाएं, 38 मालगुजारी तालाब, कोल्हापुरी पद्धति के दो बांध और एक लिफ्ट सिंचाई योजना चल रही है। इनसे खरीफ सीजन में मांग के हिसाब से संरक्षित सिंचाई होती है, फिर बचा पानी रबी और गर्मी के सीजन की सिंचाई में लगता है। इस साल के सूखे को देखते हुए हर परियोजना में कम से कम जरूरी पानी रखना अहम है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए परियोजनाओं पर गेट लगाए जाएं और जरूरी मरम्मत फौरन पूरी हो।

जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र के किसानों की पानी से जुड़ी दिक्कतें और परियोजनाओं की मरम्मत की मांगें रखीं। बांधों और तालाबों को गहरा करके पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी निधि की मांग भी हुई। पालकमंत्री ने साफ कहा कि किसानों को जरूरत के हिसाब से पानी मिले और किसी भी स्तर पर बर्बादी न हो, इसके लिए संबंधित विभाग आपसी तालमेल से काम करें।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पानी की किल्लत, बढ़ते तापमान और सूखे को देखते हुए नागरिकों और किसानों में पानी बचाने को लेकर बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाई जाए। पानी का किफायत से इस्तेमाल, सिंचाई का सही नियोजन और कम पानी वाली फसलों का विकल्प, इन बातों पर गांव स्तर पर कार्यक्रम चलाए जाएं।

बोधकसा बांध की मरम्मत पर समीक्षा: पालकमंत्री ने बोधकसा बांध की टूटी पाल के बारे में पूछा। अधिकारियों ने बताया कि पाल की मरम्मत पूरी हो चुकी है और रिसाव पूरी तरह बंद कर दिया गया है। आगे इस परियोजना की जिम्मेदारी तिरोडा तहसील की धापेवाडा परियोजना को सौंपने की जानकारी भी दी गई। बैठक में सूखे के दौरान मौजूद जल भंडार के सही प्रबंधन, पानी के बराबरी से बंटवारे और आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्लानिंग पर जोर रहा।

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