शेवगाव में हजारों पेड़ों की कटाई पर वन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
वंचित बहुजन आघाडी ने शेवगाव में हजारों पेड़ों की कटाई के मामले में दोषी वन अधिकारियों पर सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने और उन्हें निलंबित करने की मांग की है।
अहिल्यानगर जिले के शेवगाव तालुका में हजारों पेड़ों की गैरकानूनी कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। इसी को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी के जिलाध्यक्ष योगेश साठे की अगुवाई में जिलाधिकारी और जिला वनसंरक्षक अधिकारी धर्मवीर सालविठ्ठल को एक निवेदन सौंपा गया। निवेदन की मुख्य मांग है कि दोषी वन अधिकारियों पर तुरंत सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज किया जाए और उन्हें सेवा से निलंबित किया जाए।
निवेदन में कहा गया है कि इस वक्त पूरा राज्य और अहिल्यानगर जिला भीषण सूखे, बढ़ते तापमान और पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। ऐसे नाजुक हालात में प्रकृति की रक्षा करने वाले हरे-भरे पेड़ों की बेहिसाब कटाई होना और जिम्मेदार सरकारी महकमों का जानबूझकर इस पर आंखें मूंदे रखना बेहद संदिग्ध और निंदनीय है, ऐसा आरोप निवेदन में लगाया गया है।
शेवगाव इलाके का रिकॉर्ड रखना, मौके पर जाकर जांच करना, निगरानी और हिफाजत की पहली जिम्मेदारी होने के बावजूद ड्यूटी में गंभीर चूक करने के आरोप में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उनके नाम ये हैं: वनक्षेत्र अधिकारी मिलिंद गोवेकर, वनपाल संदीपकुमार एकशिंगे, उड़न दस्ते के वनपाल सचिन शिंदे, वनरक्षक बालकृष्णा बडे, उड़न दस्ते के वनरक्षक अर्जुन खेडकर, वनरक्षक सागर साळवे और वनरक्षक विजय पावले। आरोप है कि शेवगाव के कई लकड़ी गोदामों में हजारों पेड़ काटकर, वनरक्षकों और वनपालों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर लकड़ी का अवैध भंडार जमा किया गया।
निवेदन के मुताबिक यह घटना सामने आए 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, फिर भी वन विभाग की तरफ से दोषियों पर कोई ठोस प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। निवेदन में कहा गया है कि स्थानीय वन कर्मचारियों के संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर लकड़ी की कटाई, ढुलाई और भंडारण होना मुमकिन ही नहीं है।
साथ ही, शेवगाव के इस घोटाले के बीच राज्य के बेहद संवेदनशील माने जाने वाले भीमाशंकर अभयारण्य इलाके में भी इसी तरह पेड़ कटने की खबरें आ रही हैं। निवेदन में मांग की गई है कि इस पर प्रशासन आधिकारिक सफाई दे।
निवेदन में साफ लिखा गया है कि पर्यावरण का नाश कर लोगों की जान खतरे में डालने के मामले में सभी दोषी वन अधिकारियों पर सदोष मनुष्यवध का केस दर्ज किया जाए, उन्हें सरकारी सेवा से निलंबित किया जाए और इसके पीछे के लकड़ी माफिया, सॉ मिल मालिकों और मुख्य सूत्रधारों का पर्दाफाश किया जाए। इस मौके पर चेतावनी दी गई कि अगर प्रशासन ने इस गंभीर मामले की तुरंत सुध लेकर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वंचित बहुजन आघाड़ी की तरफ से लोकतांत्रिक तरीके से राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।