बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द की 50 साल की सीमा, आंगनबाड़ी सेविकाएं 55 तक पर्यवेक्षक पद की दौड़ में
हाईकोर्ट ने 3 जुलाई 2026 का शासन निर्णय रद्द किया और नए सिरे से विज्ञापन जारी करने को कहा है।
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महाराष्ट्र की आंगनबाड़ी सेविकाओं को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है। नासिक जिले की सेविकाएं भी इसमें शामिल हैं। अदालत ने राज्य सरकार का 3 जुलाई 2026 का शासन निर्णय रद्द कर दिया है। इस निर्णय में पर्यवेक्षक पद पर पदोन्नति के लिए ज्यादा से ज्यादा 50 साल की उम्र तय की गई थी।
हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण से कहा है कि वह 55 साल की उम्र सीमा के हिसाब से नया विज्ञापन निकाले और पात्र उम्मीदवारों से आवेदन मंगवाए। यानी अब पात्र सेविकाएं 55 साल की उम्र तक पदोन्नति के लिए अर्जी दे सकेंगी।
इस फैसले का फायदा उन सेविकाओं को मिलने की उम्मीद है, जो बरसों से काम कर रही हैं, लेकिन उम्र सीमा बदलने की वजह से पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर हो रही थीं।
पूरा मामला कुछ यूं है। 17 नवंबर 2001 के शासन निर्णय और 7 दिसंबर 2001 के संशोधन के तहत पात्र आंगनबाड़ी सेविकाओं पर 55 साल की उम्र तक पदोन्नति के लिए विचार किया जा सकता था। इसके बाद राज्य सरकार ने 3 जुलाई 2026 के शासन निर्णय से यह अधिकतम उम्र घटाकर 50 साल कर दी।
इस बदलाव को चुनौती देते हुए सेविकाओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने माना कि सालों से चली आ रही व्यवस्था के आधार पर सेविकाओं को यह उम्मीद रखने का वैध हक था कि 55 साल तक उनके नाम पर पदोन्नति के लिए विचार होगा। उम्र सीमा घटने से जो सेविकाएं प्रभावित हो रही थीं, उन्हें इस फैसले से राहत मिली है।
हालांकि अदालत के निर्देशों के मुताबिक उम्र सीमा में राहत का मतलब यह नहीं है कि सभी सेविकाओं को अपने आप पदोन्नति मिल जाएगी। पर्यवेक्षक पद के लिए तय सेवा अवधि, शैक्षणिक योग्यता और बाकी जरूरी शर्तें पूरी करनी ही होंगी।
उपलब्ध न्यायिक ब्योरे के मुताबिक आंगनबाड़ी सेविका के तौर पर कम से कम 10 साल का अनुभव जरूरी है। जो सेविकाएं ये शर्तें पूरी करती हैं, वे नए विज्ञापन के तहत आवेदन कर सकेंगी।
अब संबंधित प्राधिकरण को नया विज्ञापन निकालकर आवेदन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इससे 50 से 55 साल की उम्र वाली पात्र सेविकाओं को भी पदोन्नति की प्रतिस्पर्धा में उतरने का मौका मिलेगा। सेविकाओं की नजर अब नए विज्ञापन और आगे की प्रक्रिया पर टिकी है।