बीएमसी में दिवाली बोनस पर तकरार, अश्रफ आजमी बोले- प्रशासन पर सत्ताधारियों का अंकुश नहीं
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कांग्रेस के दलनेता अश्रफ आजमी का आरोप है कि महापौर की घोषणा से पहले ही प्रशासन ने बोनस की रकम सिस्टम में चढ़ा दी। चर्चा के बाद कर्मचारियों का बोनस 32 हजार रुपये तय हुआ।
मुंबई महानगर पालिका के कर्मचारियों के दिवाली बोनस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के दल नेता और पार्षद अश्रफ आजमी का आरोप है कि इस मामले में प्रशासन और महापौर के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। उनका कहना है कि महापौर के आधिकारिक ऐलान से पहले ही प्रशासन ने कर्मचारियों के वेतन सिस्टम में 31 हजार रुपये के बोनस की एंट्री कर दी थी। इसी बात पर उन्होंने प्रशासन के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए। आजमी ने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा और शिवसेना के सत्ताधारियों का महानगर पालिका प्रशासन पर कोई अंकुश नहीं है।
आजमी के मुताबिक महानगर पालिका में बोनस तय करने से पहले एक परंपरा चलती आई है। महापौर, सभी पार्टियों के दल नेता, श्रमिक संगठन, अधिकारी संगठन और प्रशासन आपस में बैठकर बात करते हैं, उसके बाद ही रकम तय होती है। उनका आरोप है कि इस बार महापौर के ऐलान से पहले ही प्रशासन ने एसएपी (SAP) सिस्टम में दर्ज कर दिया कि 31 हजार रुपये का बोनस तनख्वाह के साथ दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बैठक पहले से तय थी और उससे पहले ही रकम को सिस्टम में डाल देना महापौर के अधिकारों का उल्लंघन है। आजमी ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की।
महापौर के एंटी-चेंबर में सभी दल नेताओं की बैठक हुई और उसके बाद बोनस की रकम पर फैसला लिया गया। आजमी ने बताया कि कांग्रेस की मांग 35 हजार रुपये के बोनस की थी, लेकिन चर्चा के बाद कर्मचारियों को 32 हजार रुपये देना तय हुआ। उनके मुताबिक हर कर्मचारी के बोनस में दो हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे महानगर पालिका पर करीब 32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
आजमी ने यह भी बताया कि इस बार आशा वर्कर्स और हेल्थ वर्कर्स के बोनस में भी इजाफा करने का फैसला हुआ है। जिन कर्मचारियों को पहले 14 हजार रुपये बोनस मिलता था, उन्हें अब 16 हजार रुपये मिलेंगे। जिन्हें पांच हजार रुपये मिलते थे, उन्हें अब सात हजार रुपये मिलेंगे।
आजमी ने प्रशासन पर मनमानी बढ़ने की बात कही और आरोप लगाया कि प्रशासन महापौर की सुनता नहीं है। उनका कहना था कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि एक गाड़ी के दो पहियों की तरह हैं और दोनों मिलकर काम करेंगे, तभी मुंबई वालों की समस्याएं सुलझ सकती हैं। उन्होंने महापौर और सत्ताधारी भाजपा-शिवसेना को सलाह दी कि वे अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल करें। उनके मुताबिक विपक्ष को भरोसे में लिए बिना एकतरफा फैसले लिए गए तो उसका नुकसान सत्ताधारियों को ही उठाना पड़ सकता है।
आजमी का कहना है कि भाजपा-शिवसेना के सत्ताधारियों का महानगर पालिका प्रशासन पर बिल्कुल अंकुश नहीं है। बोनस के फैसले को लेकर उठे इस विवाद से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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