गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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16:00 IST

नाहुर और ऐरोली के बीच 1.6 किमी का डबल-डेकर केबल-स्टे ब्रिज बनाएगी बीएमसी

गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के आखिरी चरण में बनने वाले पुल पर 1354.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे, लक्ष्य अक्टूबर 2030 का है।

नाहुर और ऐरोली के बीच 1.6 किमी का डबल-डेकर केबल-स्टे ब्रिज बनाएगी बीएमसी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाले रास्तों में जल्द ही बड़ा बदलाव दिखने वाला है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। इस प्रोजेक्ट के आखिरी चरण में नाहुर और ऐरोली के बीच 1.6 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर केबल-स्टे ब्रिज बनाया जाएगा।

अभी गोरेगांव से ऐरोली पहुंचने में डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। नया पुल बनने के बाद यही सफर सिर्फ 20 मिनट में पूरा होना मुमकिन होगा।

यह नया डबल-डेकर पुल मौजूदा ऐरोली-नाहुर पुल के ठीक ऊपर और उसके समानांतर रहेगा। GMLR प्रोजेक्ट के तहत पश्चिमी उपनगरों से भूमिगत मार्ग (अंडरग्राउंड रास्ते) से आने वाली गाड़ियां सीधे इस नए पुल पर चढ़ सकेंगी। इससे मौजूदा पुल पर पड़ने वाला दबाव काफी घट जाएगा। पुल की शुरुआत नाहुर रेलवे स्टेशन के पास होगी और ऐरोली टोल प्लाजा के पास यह मुख्य सड़क से मिल जाएगा।

प्रोजेक्ट में सिर्फ मुख्य पुल ही नहीं है। ठाणे और वाशी की तरफ से आने वाली गाड़ियों की सहूलियत के लिए चार क्लोवरलीफ (Cloverleaf) यानी गोलाकार जोड़ने वाले रैंप भी डिजाइन किए गए हैं। इनकी वजह से इन इलाकों से आने वाले वाहन चालकों को गोरेगांव की तरफ जाने वाले भूमिगत मार्ग में सीधे एंट्री मिलना आसान होगा। ऐरोली जंक्शन पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट पर करीब 1354.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसका डिजाइन पहले ही मंजूर हो चुका है। बीएमसी ने तकनीकी मंजूरी और फिजिबिलिटी स्टडी के लिए वीरमाता जिजाबाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VJTI) को नियुक्त किया है। इसके लिए संस्थान को 6 करोड़ रुपये की फीस दी जा रही है। प्रशासन के प्लान के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को अक्टूबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक GMLR का यह आखिरी चरण मुंबई की पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा। इसका मुख्य मकसद मौजूदा पुल पर लगने वाला ट्रैफिक जाम तोड़ना और उपनगरों में आवाजाही को ज्यादा आसान बनाना है।

प्रोजेक्ट पूरा होने पर मुंबई और नवी मुंबई के बीच रोज सफर करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों और आम नागरिकों का वक्त बचेगा और उनकी परेशानी भी कम होगी।

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