मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

गाड़ी का बीमा लेने से पहले ये 5 चूकें टालें, वरना क्लेम अटक सकता है

कार या बाइक का बीमा कराते समय सस्ते प्रीमियम के पीछे भागना, तुलना न करना और फॉर्म में गलत जानकारी देना भारी पड़ सकता है।

गाड़ी का बीमा लेने से पहले ये 5 चूकें टालें, वरना क्लेम अटक सकता है
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आज के दौर में गाड़ी रखना जरूरत बन गई है, लेकिन उससे भी जरूरी है उस गाड़ी का बीमा। आजकल एक्सीडेंट की संख्या बढ़ती दिख रही है। भारत में गाड़ी का बीमा कानूनन जरूरी है और बीमा न हो तो जुर्माना भरना पड़ता है। पर बात सिर्फ कानून की नहीं है। सड़क पर हादसा हो जाए, गाड़ी चोरी हो जाए या कोई नुकसान हो जाए, तो लाखों रुपये का बोझ पड़ सकता है।

ऐसे वक्त के लिए ही बीमा होता है। मगर बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि बीमा लेते समय किन बातों का ध्यान रखना है। वे जल्दबाजी में बीमा ले लेते हैं और जब सच में जरूरत पड़ती है, तब कंपनी क्लेम नामंजूर कर देती है। फिर पैसे अपनी जेब से देने पड़ते हैं। इसलिए ये 5 गलतियां टालनी चाहिए।

पहली गलती है सिर्फ सबसे सस्ता बीमा ढूंढना। कई लोग वही बीमा लेते हैं जिसमें प्रीमियम सबसे कम हो, और यही सबसे बड़ी चूक है। कम पैसे में बीमा देने वाली कंपनियां कई चीजों को कवर ही नहीं करतीं। ऊपर से सस्ता लगता है, पर एक्सीडेंट होने पर पता चलता है कि कुछ मिल ही नहीं रहा। कुछ कंपनियां प्रीमियम कम लेती हैं लेकिन क्लेम देते वक्त बहुत परेशान करती हैं और महीनों चक्कर कटवाती हैं। इसलिए सिर्फ प्रीमियम मत देखिए। यह भी देखिए कि कंपनी कितनी पुरानी है, उस पर कितना भरोसा किया जा सकता है, कैशलेस गैराज कितने हैं और क्लेम जल्दी पास करती है या नहीं।

दूसरी गलती है दूसरी कंपनियों से तुलना न करना। सब कुछ ऑनलाइन होने के बावजूद लोग एक ही एजेंट के पास जाते हैं और उसने जो बीमा बताया, वही ले लेते हैं। बाजार में और क्या विकल्प हैं, यह देखा ही नहीं जाता। बीमा लेने से पहले या पुराना बीमा रिन्यू करने से पहले 4-5 कंपनियों के प्लान ऑनलाइन चेक कर लीजिए। हर कंपनी अलग ऑफर और अलग फायदे देती है। तुलना करने पर पता चलेगा कि कम पैसे में बेहतर कवरेज कहां मिल रहा है। यह दो मिनट का काम है, पर इससे हजारों रुपये बच सकते हैं।

तीसरी बात यह गलतफहमी है कि ऑनलाइन बीमा महंगा होता है। कई लोगों को लगता है कि एजेंट से ऑफलाइन लेने पर सस्ता पड़ेगा, जबकि असल में उल्टा है। ऑनलाइन बीमा लेने पर कंपनी को एजेंट को कमीशन नहीं देना पड़ता और ऑफिस का खर्च भी बचता है। इसलिए वही कंपनी ऑनलाइन कम कीमत में ज्यादा अच्छा बीमा देती है। ऑनलाइन डिस्काउंट और एक्स्ट्रा ऑफर भी ज्यादा होते हैं। तो ऑफलाइन लेने से पहले एक बार ऑनलाइन कीमत जरूर देख लें।

चौथी गलती है सेकंड हैंड गाड़ी लेने के बाद बीमा अपने नाम पर न कराना। पुरानी गाड़ी खरीदने वाले सबसे ज्यादा यहीं फंसते हैं। गाड़ी लेते ही RTO में नाम चढ़वा लेते हैं और समझ लेते हैं कि काम खत्म। पर बीमे का क्या? RTO में गाड़ी नाम होने से काम पूरा नहीं होता। पुराने मालिक के नाम का बीमा आपको 14 दिन के अंदर अपने नाम कराना होता है। अगर बीमा पुराने मालिक के नाम पर ही रहा और आपसे एक्सीडेंट हो गया, तो कंपनी एक रुपया भी नहीं देगी। वह कहेगी कि बीमा आपके नाम पर है ही नहीं। फिर पूरा खर्च आपको खुद उठाना पड़ेगा। इसलिए सेकंड हैंड गाड़ी लेते ही सबसे पहले बीमा ट्रांसफर कराइए।

पांचवीं गलती है फॉर्म में गलत जानकारी भरना। प्रीमियम कम आए इसलिए, या अनजाने में, लोग गलत जानकारी भर देते हैं। पता गलत, गाड़ी का मॉडल गलत, या गाड़ी में CNG किट लगी है तो उसे छुपा लेते हैं। बीमा भरोसे का करार है और आपकी दी हुई हर जानकारी सही होनी चाहिए। नाम, पता, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और गाड़ी का इस्तेमाल प्राइवेट होता है या कमर्शियल, यह सब सच-सच लिखिए। अगर आपने कुछ छुपाया और बाद में कंपनी को पता चल गया, तो आपका क्लेम पूरी तरह रद्द हो सकता है।

साथ ही सिर्फ बेसिक बीमा मत लीजिए। जीरो डेप, इंजन प्रोटेक्शन और रोडसाइड असिस्टेंस जैसे ऐड-ऑन भी लीजिए। थोड़े ज्यादा पैसे लगेंगे, पर जरूरत के वक्त यही काम आएंगे। याद रखिए, सही जानकारी के साथ लिया गया बीमा ही असली मुसीबत में आपकी ढाल बनता है।

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