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12:37 IST

बच्चों की हड्डियों और जोड़ों की देखभाल पर जोर, 19 अक्टूबर को मनाया जाता है खास दिन

हर साल 19 अक्टूबर को विश्व बाल अस्थि और जोड़ दिन यानी World Pediatric Bone and Joint Day मनाया जाता है, ताकि बच्चों की हड्डियों और जोड़ों की बीमारियों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़े।

बच्चों की हड्डियों और जोड़ों की देखभाल पर जोर, 19 अक्टूबर को मनाया जाता है खास दिन तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बच्चों की हंसी, खेलकूद और दौड़भाग से हर घर में रौनक रहती है। इस चंचलता के पीछे शरीर का सबसे अहम हिस्सा उनकी हड्डियां और जोड़ होते हैं। इसी को ध्यान में रखकर हर साल 19 अक्टूबर को पूरी दुनिया में 'विश्व बाल हड्डी और जोड़ दिवस' (World Pediatric Bone and Joint Day) मनाया जाता है। इस दिन का मकसद बचपन में होने वाली हड्डियों और जोड़ों की बीमारियों के बारे में समाज में बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाना है। साथ ही यह समझाना भी कि वक्त पर डॉक्टर की सलाह और इलाज कितना जरूरी है। बच्चे के शारीरिक विकास और पूरी सेहत के लिए हड्डियों का मजबूत होना बहुत जरूरी है।

आज के डिजिटल दौर में बच्चों की लाइफस्टाइल काफी बदल गई है। मैदान में खेलने की जगह मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के सामने बैठे रहने का चलन बढ़ गया है। इसकी वजह से छोटी उम्र में ही बच्चों में हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों का दर्द, पीठ की तकलीफ और विटामिन डी की कमी जैसी दिक्कतें दिखने लगी हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर बच्चों की हड्डियों या जोड़ों की परेशानी पर वक्त रहते ध्यान न दिया जाए, तो बड़े होने पर शरीर में हमेशा के लिए कोई कमी या गंभीर और लंबी बीमारी हो सकती है। इसलिए बचपन में ही अभिभावकों का सतर्क रहना जरूरी बताया गया है।

इस दिन के मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Specialists), अस्पताल और कई सामाजिक व स्वास्थ्य संस्थाएं खास मुहिम चलाती हैं। स्कूल, नर्सरी और स्वास्थ्य केंद्रों में जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में अभिभावकों और टीचरों को बताया जाता है कि बच्चों की हड्डियों की देखभाल कैसे करें, खानपान कैसा हो और शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि शरीर की ज्यादातर हड्डियों की मजबूती और घनत्व बचपन और किशोरावस्था (Adolescence) में बनता है। इस उम्र में हड्डियों को सही पोषण न मिले, तो आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इस दिन का जोर सिर्फ बीमारी के इलाज पर नहीं है, बल्कि बीमारी हो ही न, इसके लिए बचाव के उपाय (Preventive Care) अपनाने पर भी है।

बच्चों की हड्डियां मजबूत रखने के लिए तीन बातों पर खास ध्यान देने को कहा गया है। पहली है संतुलित पोषण। रोज के खाने में कैल्शियम और विटामिन डी भरपूर होना चाहिए। दूध, दही, छाछ, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, रागी, तिल और सूखे मेवे से हड्डियों को जरूरी पोषण मिलता है।

दूसरी बात है धूप। आजकल बच्चे ज्यादातर वक्त घर में रहते हैं, इसलिए उनमें विटामिन डी की भारी कमी दिखती है। बताया गया है कि सुबह की कोमल धूप में कम से कम 15 से 20 मिनट खेलने से शरीर में विटामिन डी बनता है, जो कैल्शियम सोखने के लिए बहुत जरूरी है। तीसरी बात है कसरत। दौड़ना, रस्सी कूदना, साइकिल चलाना और मैदानी खेल खेलने से हड्डियों पर अच्छा दबाव पड़ता है, जिससे वे ज्यादा मजबूत और लचीली बनती हैं।

कई बार बच्चे पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत करते हैं और बहुत से अभिभावक इसे 'ग्रोइंग पेन्स' (Growing Pains) यानी बढ़ने का दर्द मानकर टाल देते हैं। लेकिन हर दर्द मामूली नहीं होता। अगर बच्चा चलते वक्त लंगड़ाता हो, जोड़ों पर सूजन या लालिमा दिखे, बच्चा बार-बार गिरता हो या उठने-बैठने में उसे तकलीफ होती हो, तो ये हड्डियों या जोड़ों की समस्या के लक्षण हो सकते हैं।

इसके अलावा रीढ़ की हड्डी का मुड़ना, हड्डियों का आसानी से टूटना (बार-बार फ्रैक्चर होना) या जोड़ों से आवाज आना जैसी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और फौरन बाल हड्डी रोग विशेषज्ञ (Pediatric Orthopedic Doctor) की सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती दौर में ही पता चल जाए, तो सही दवा, फिजियोथेरेपी या आसान कसरत से ये बीमारियां पूरी तरह ठीक हो सकती हैं।

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