महाराष्ट्र में 94 लाख बच्चों की जांच, 6.58 लाख बच्चों में सेहत की दिक्कतें मिलीं
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के 2026-27 के आंकड़े सामने आए हैं। अंगणवाडी में 69 फीसदी और स्कूलों में 43 फीसदी बच्चों की जांच हुई है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के 2026-27 में अमल की तस्वीर सामने आई है। इस कार्यक्रम का मकसद बच्चों की बीमारियों का जल्दी पता लगाना और उन्हें वक्त पर इलाज दिलाना है। 1 अप्रैल से 20 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अंगणवाडी के 41 लाख 28 हजार 674 बच्चों की और स्कूलों के 53 लाख 55 हजार 431 विद्यार्थियों की सेहत जांच हुई है। इन जांचों में 6 लाख 58 हजार 384 बच्चों में सेहत से जुड़ी दिक्कतें मिली हैं।
यह कार्यक्रम फरवरी 2013 में शुरू हुआ था। इसमें जन्म से 18 साल तक के बच्चों में चार चीजों का जल्दी पता लगाने पर जोर है: जन्मजात खराबी, बचपन की बीमारियां, कमी और विकास में देरी। नवजात बच्चों की जांच उनके जन्म की जगह पर होती है। छह हफ्ते से छह साल तक के बच्चों की जांच अंगणवाडी में होती है। छह से 18 साल तक के विद्यार्थियों की जांच सरकारी और अनुदानित स्कूलों में की जाती है।
अंगणवाडी में 60 लाख 9 हजार 756 बच्चों की जांच का लक्ष्य था। इनमें से 41 लाख 28 हजार 674 बच्चों की जांच हो चुकी है, यानी लक्ष्य का 69 फीसदी। राज्य के 1 लाख 10 हजार 364 अंगणवाडी केंद्रों में से 89 हजार 42 केंद्रों की जांच हुई है। केंद्रों के हिसाब से यह आंकड़ा 80 फीसदी बैठता है।
स्कूलों में जांच का आंकड़ा इससे कम है। 1 करोड़ 24 लाख 43 हजार 889 विद्यार्थियों का लक्ष्य था और 53 लाख 55 हजार 431 की जांच हुई है, यानी 43 फीसदी। राज्य के 88 हजार 278 स्कूलों की जांच का लक्ष्य था, जिनमें से 59 हजार 494 स्कूलों में जांच हो चुकी है। यह 67 फीसदी है।
जांच में जिन बच्चों की हालत गंभीर पाई जाती है, उन्हें आगे के इलाज के लिए भेजा जाता है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 820 हृदय की सर्जरी तय की गई थीं, जिनमें से 810 पूरी हो चुकी हैं। बाकी सर्जरी के लिए तय 7259 में से 7252 पूरी हुई हैं।
कार्यक्रम को लागू करने के लिए राज्य में 1196 मोबाइल हेल्थ टीमें काम कर रही हैं। हर टीम में दो मेडिकल अफसर, एक एएनएम और एक फार्मासिस्ट होता है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से आरबीएसके 2.0 पोर्टल शुरू किया गया है। इसका इस्तेमाल तीन स्तरों पर हो रहा है: मोबाइल हेल्थ टीम, जिला आरबीएसके और राज्य आरबीएसके।