19 अक्टूबर को स्तन कैंसर जागरूकता दिवस, शुरुआती पांच लक्षणों की जानकारी
विश्व स्तन कैंसर दिन पर बताए गए पांच शुरुआती लक्षण, स्व-जांच का तरीका और पिंक रिबन अभियान की जानकारी।
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हर साल 19 अक्टूबर को विश्व स्तन कैंसर दिन यानी वर्ल्ड ब्रेस्ट कैंसर डे मनाया जाता है। पूरा अक्टूबर महीना स्तन कैंसर जागरूकता माह (Pink October) के नाम से जाना जाता है। इस दिन का मकसद है कि महिलाएं बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानें, नियमित रूप से खुद जांच करें और बिना डरे सही वक्त पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए आगे आएं।
जानकारी के मुताबिक स्तन कैंसर (Breast Cancer) दुनिया और भारत, दोनों जगह महिलाओं में होने वाले कैंसर के प्रकारों में सबसे आम और तेजी से बढ़ने वाली बीमारी माना जाता है। आज की भागदौड़ वाली और बदलती लाइफस्टाइल में महिलाओं की सेहत सबसे ज्यादा नजरअंदाज होती है। कई बार डर, झिझक या जानकारी की कमी की वजह से बीमारी का पता वक्त पर नहीं चल पाता।
मेडिकल साइंस की तरक्की का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्तन कैंसर का समय रहते पता चल जाए तो 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में पूरा इलाज मुमकिन होता है। इसी वजह से "जागरूकता ही बचाव की पहली सीढ़ी है" इस सूत्र को सामने रखकर यह दिन खास कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।
बताया गया है कि शुरुआती दौर में स्तन कैंसर में आम तौर पर तेज दर्द नहीं होता। इसलिए शरीर में होने वाले छोटे बदलावों पर बारीकी से नजर रखना जरूरी कहा गया है। नीचे के लक्षण दिखें तो बिना झिझक विशेषज्ञ डॉक्टर (Gynecologist या Oncologist) से सलाह लेने की बात कही गई है।
पहला लक्षण है गांठ या मोटापन बढ़ना, यानी स्तन या बगल (Axilla) में कोई नई, सख्त या बिना दर्द वाली गांठ महसूस होना। दूसरा, त्वचा में बदलाव, जैसे स्तन की त्वचा का रंग लाल होना या त्वचा संतरे के छिलके जैसी खुरदरी दिखना या उसमें गड्ढा पड़ना।
तीसरा लक्षण निप्पल में बदलाव है, यानी निप्पल का अंदर की तरफ खिंच जाना (Inverted Nipple) या उसके आकार में अचानक फर्क आना। चौथा, असामान्य स्राव, यानी गर्भावस्था या स्तनपान का दौर न होने पर भी निप्पल से पानी, पीला द्रव या खून जैसा स्राव निकलना। पांचवां लक्षण सूजन या आकार में फर्क है, यानी दोनों स्तनों के आकार या बनावट में अचानक बड़ा अंतर महसूस होना।
स्व-जांच (Breast Self-Examination, BSE) के बारे में बताया गया है कि 20 साल से ऊपर की हर महिला के लिए हर महीने अपने स्तनों की जांच करना फायदेमंद है। यह जांच पीरियड खत्म होने के 3 से 5 दिन बाद करनी चाहिए। जिन महिलाओं के पीरियड बंद हो चुके हैं (Menopause), उन्हें महीने में एक तारीख तय करके जांच करने को कहा गया है। आईने के सामने खड़े होकर स्तनों का आकार, त्वचा और निप्पल देखना, और लेटकर उंगलियों के पोरों से गोल घुमाते हुए (Circular motion) छूकर गांठ टटोलना, इस आसान तरीके से महिलाएं खुद नजर रख सकती हैं। 40 या 45 साल की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह से साल में एक बार मैमोग्राफी (स्तनों की एक्स-रे स्कैनिंग) कराना बेहद सुरक्षित माना जाता है।
जोखिम बढ़ाने वाली वजहों में अनुवांशिकता (Family History), उम्र, हार्मोन का असंतुलन (Estrogen Level), देर से शादी या पहला बच्चा देर से होना, स्तनपान न कराना, धूम्रपान, शराब और मोटापा गिनाए गए हैं। बचाव के लिए रोज के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, फाइबर वाला अनाज और एंटी-ऑक्सीडेंट्स शामिल करने, प्रोसेस्ड और ज्यादा चर्बी वाला खाना टालने, रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलने, योग या हल्की कसरत करने और तंबाकू, सिगरेट व शराब से दूर रहने की बात कही गई है। यह भी बताया गया है कि नवजात बच्चे को वक्त पर स्तनपान कराने से मां में स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
गुलाबी रिबन (Pink Ribbon) को स्तन कैंसर के खिलाफ दुनिया भर की लड़ाई में उम्मीद, साथ और जागरूकता की निशानी माना जाता है। 19 अक्टूबर को और पूरे अक्टूबर महीने में दुनिया भर के अस्पताल, NGOs और सामाजिक संगठन मुफ्त जांच शिविर, वेबिनार, पदयात्रा और काउंसलिंग सत्र आयोजित करते हैं। सोशल मीडिया पर #BreastCancerAwareness और #PinkOctober जैसे अभियानों की वजह से आज की नई पीढ़ी भी इस पर खुलकर बात कर रही है।