अमेरिका ने ICC पर लगाए प्रतिबंध, रुबियो बोले धमकियां बंद करे वरना संस्था खत्म कर देंगे
डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर सीधे प्रतिबंध लगाए हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ICC धमकियां देना बंद करे, वरना अमेरिका खुद इसे खत्म कर देगा।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर सीधे प्रतिबंध लगा दिए हैं। युद्ध अपराधों की जांच करने वाले इस अहम न्यायाधिकरण पर अमेरिका ने अब तक के सबसे सख्त आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंध लगाए हैं। इस फैसले से वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है।
फैसले का बचाव करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। रुबियो ने सीधी और कड़ी चेतावनी दी कि 'ICC या तो अमेरिकी नागरिकों और उसके मित्र देशों को धमकियां देना तुरंत बंद करे, वरना हम खुद पहल करके ICC नाम की संस्था को ही रद्द या भंग कर देंगे।'
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब ICC की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्ले को 2026 का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के कुछ ही घंटे बीते हैं। अमेरिका और इस अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध न्यायाधिकरण के बीच पहले से तनाव भरे रिश्ते अब सीधे टकराव के मोड़ पर पहुंच गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन के इस कदम का असर सिर्फ अदालत के कामकाज पर नहीं पड़ेगा, बल्कि अमेरिका के यूरोपीय मित्र देशों के साथ रिश्तों में भी बड़ा तूफान खड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक नए प्रतिबंध ICC के रोजमर्रा के कामकाज पर बहुत दूरगामी और नुकसानदेह असर डाल सकते हैं। ये प्रतिबंध कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं हैं। ये दुनिया भर की निजी कंपनियों को अदालत को किसी भी तरह की तकनीकी या व्यावसायिक सेवा देने से रोकते हैं। इससे ICC को मिलने वाली बैंकिंग, बीमा, सॉफ्टवेयर, डेटा सर्वर और दूसरी जरूरी सेवाओं की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है।
इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने ICC के कुछ खास अभियोजकों (Prosecutors) और न्यायाधीशों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए थे। इस बार सीधे संस्था को निशाना बनाया गया है। अगर दुनिया के बैंक और सॉफ्टवेयर कंपनियां अमेरिकी जुर्माने के डर से ICC के साथ लेन-देन बंद कर देती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के लिए अपने वैश्विक मुकदमे चलाना और रोजमर्रा का प्रशासनिक काम संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
रुबियो ने आधिकारिक बयान जारी होने से पहले मीडिया से बात करते हुए फैसले का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किसी भी हालत में ICC को अमेरिकी सैनिकों या नागरिकों पर मुकदमे चलाने की इजाजत नहीं देंगे।' रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को साफ शब्दों में 'बदमाश अदालत' (Rogue Court) कहा। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस संस्था के आर्थिक संसाधन रोकने और उसकी काम करने की क्षमता को पूरी तरह कमजोर करने के लिए उसके साथ होने वाले तमाम लेन-देन पर रोक लगा रहा है।
रुबियो ने आगे कहा कि 'ये प्रतिबंध ICC और उससे जुड़े सदस्य देशों के लिए अमेरिका की संप्रभुता को लेकर उसकी चिंताएं दूर करने का आखिरी मौका हैं।' इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि अमेरिका का ट्रेजरी विभाग देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कुछ खास लाइसेंस जारी करेगा, जिनके जरिए मानवीय या खास जरूरी गतिविधियों को अस्थायी छूट दी जा सकती है।
ट्रम्प प्रशासन ने पहले साफ किया था कि इस उम्मीद में उसने यह सख्त कार्रवाई कुछ समय के लिए टाल दी थी कि ICC और 'रोम संधि' (Rome Statute) में शामिल देश आपस में यह विवाद कूटनीतिक रास्ते से सुलझा लेंगे। लेकिन ये सारी कोशिशें पूरी तरह नाकाम रहीं। अमेरिका का कहना है कि अदालत लगातार अपने अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अमेरिकी नागरिकों और उसके मित्र देशों को निशाना बना रही है।
रुबियो ने कहा, 'अब बातचीत का वक्त खत्म हो चुका है। या तो ICC अपनी राजनीतिक धमकियां देना बंद करेगा, नहीं तो हम खुद ICC को ही रद्द कर देंगे। वॉशिंगटन को अपने यूरोपीय और दूसरे मित्र देशों से यही उम्मीद है कि वे इस अदालत की मनमानी पर तुरंत लगाम लगाएं।' इस फैसले के बाद दुनिया भर में मानवाधिकार संगठनों और अलग-अलग देशों की सरकारों में हड़कंप मच गया है।