शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

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01:12 IST

एच-1बी वीजाधारकों को 'गुलाम' कहने पर भारत का कड़ा एतराज, विदेश मंत्रालय का बयान जारी

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और PERM व एच-1बी का फर्क समझाया।

एच-1बी वीजाधारकों को 'गुलाम' कहने पर भारत का कड़ा एतराज, विदेश मंत्रालय का बयान जारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी करके अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस की एक टिप्पणी पर कड़ा एतराज जताया है। मामला एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले लोगों से जुड़ा है। मंत्रालय का कहना है कि इन भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और कुशल पेशेवरों को 'गिरवी मजदूर' या 'गुलाम' (Indentured Labor) कहना बेहद आपत्तिजनक और गलत है। मंत्रालय के मुताबिक यह शब्द उपनिवेशवादी शोषण के दर्दनाक इतिहास की याद दिलाता है।

अमेरिका में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीजा धोखाधड़ी और रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए वेंस ने एच-1बी वीजाधारकों पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियां अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रही हैं और बाहर से सस्ते मजदूर लाकर अमेरिकी कामगारों की तनख्वाह घटा रही हैं। इस बयान के बाद अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और तकनीशियनों में चिंता फैल गई थी।

वेंस ने अपने दावे में कहा था, "अगर आप अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करते हैं, तो उसी पद पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिक के मुकाबले आपको 20,000 डॉलर कम तनख्वाह मिलती है। और अगर आपको किसी विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनी ने नौकरी पर रखा है, तो यह फर्क 48,000 डॉलर तक पहुंच जाता है। कंपनियां अमेरिकी कामगारों को निकाल देती हैं और उनकी जगह कम पगार पर काम करने वाले विदेशी मजदूरों को रख लेती हैं।" भारत के विदेश मंत्रालय ने वेंस के इस बयान को तथ्यहीन बताया है और कहा है कि यह हकीकत की अनदेखी करता है।

अपने बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का इतिहास दुनिया भर से आए प्रवासियों की मेहनत, लगन और नवाचार से बना है। आज अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवर ऊंची पढ़ाई वाले, कुशल और अपने-अपने क्षेत्र के जानकार हैं। वे सिर्फ नौकरी नहीं करते, बल्कि अमेरिका के आर्थिक विकास, टेक इकोसिस्टम और इनोवेशन इकोसिस्टम में अहम योगदान देते हैं। मंत्रालय के मुताबिक ऐसे कुशल लोगों की तुलना बंधुआ मजदूरों से करना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे उनकी मेहनत और प्रतिभा का अपमान होता है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "हुनर और टैलेंट की आवाजाही (Talent Mobility) दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। इससे भारतीयों को दुनिया भर में मौके मिलते हैं, और अमेरिकी कंपनियां भी दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रतिभा को अपनी ओर खींच पाती हैं। इससे अमेरिका में रिसर्च, उत्पादकता, अंतरराष्ट्रीय मुकाबले की ताकत और नए रोजगार बनाने को बढ़ावा मिलता है। साथ ही वहां के शेयरधारकों (Shareholders) की दौलत बढ़ाने में भी मदद होती है।"

इसी बयान में विदेश मंत्रालय ने एक अहम तकनीकी बात भी साफ की। अमेरिका के श्रम विभाग ने कुछ कंपनियों के स्थायी श्रम प्रमाणपत्र (PERM) कार्यक्रम को लेकर जो फैसला लिया है, उसकी भारत को पूरी जानकारी है। लेकिन मंत्रालय के मुताबिक PERM और एच-1बी वीजा दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। PERM आवेदनों के निलंबन का, अमेरिका में वैध एच-1बी वीजा पर रह रहे भारतीय कर्मचारियों या उनके परिवारों की मौजूदा स्थिति पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ता।

हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि जिन कंपनियों पर इस फैसले का असर पड़ा है, वहां काम करने वाले कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड (Green Card) प्रक्रिया में कुछ हद तक देरी हो सकती है। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले पर भारत सरकार अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में है और भारतीय नागरिकों के हक की हिफाजत के लिए प्रतिबद्ध है।

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