जिनेवा में भारत का पाकिस्तान को जवाब: परमाणु धमकी से नहीं डरेंगे, कब्जा खाली करो
संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति की बैठक में भारत ने "प्रत्युत्तर के अधिकार" का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के दावों को खारिज किया।
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भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की धमकियों का जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूतों ने साफ कहा कि भारत पाकिस्तान की परमाणु धमकी से कभी नहीं डरेगा। उन्होंने पाकिस्तान के दावों को झूठा और गुमराह करने वाला बताते हुए उन पर कड़ी आपत्ति जताई।
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति की बैठक हुई। इसमें भारत ने अपने "प्रत्युत्तर के अधिकार" (Right of Reply) का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान को जवाब दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली किसी भी परमाणु बम या जंग की धमकी के आगे नहीं झुकेगी और अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है।
बैठक निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर थी। स्रोत के मुताबिक पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इसमें कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जो कामयाब नहीं हुई। जिनेवा की निरस्त्रीकरण परिषद में भारत की तरफ से भारत के स्थायी मिशन में वरिष्ठ सलाहकार (निरस्त्रीकरण) अनमोल शेर सिंह बेदी ने देश का पक्ष रखा।
बेदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा हमेशा था, है और रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत कभी बेवजह का टकराव या जंग नहीं चाहता। लेकिन सीमा पार से हो रही गैरजिम्मेदार हरकतें और आतंकवाद को शह देने की प्रवृत्ति पूरे इलाके का संकट और गंभीर बना रही है, यह गंभीर चेतावनी भी उन्होंने दी।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सामने यह बात मजबूती से रखी कि परमाणु हथियारों को सरकारों या किसी को भी ब्लैकमेल करने का आसान जरिया नहीं समझा जाना चाहिए। पाकिस्तान के रुख पर बेदी ने कहा, "आतंकवादी कार्रवाइयों और परोक्ष कृत्यों के नतीजों को छिपाने या सीमित करने के लिए परमाणु बम की धमकियों का इस्तेमाल करने वाला नजरिया तनाव कम करने की कोई गुंजाइश नहीं बनाता, बल्कि इससे पूरे दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।"
भारत ने दुनिया को फिर याद दिलाया कि उसकी सैन्य क्षमता और नीति पूरी तरह रक्षात्मक (Defensive) मकसद से बनाई गई है और यह किसी शांतिप्रिय देश के खिलाफ नहीं है। साथ ही कहा गया कि अगर सीमा पार की आतंकी गतिविधियों और भड़काऊ हरकतों का स्थायी हल नहीं निकाला गया, तो शांति सिर्फ दो जंगों या संकटों के बीच की अस्थायी खामोशी बनकर रह जाएगी। इसका मतलब साफ है कि दहशत फैलाने के लिए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का सिलसिला अब रुकना चाहिए।
इस बैठक में भारत ने एक और सीधी मांग रखी। भारत ने कहा, "हम मांग करते हैं कि भारत के जिस हिस्से पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया गया है, उस इलाके को पाकिस्तान जल्द से जल्द खाली करके भारत को लौटा दे।"
भारत ने कहा कि वह हमेशा दुनिया में शांति के पक्ष में रहा है और सबके साथ अच्छे और शांतिपूर्ण रिश्ते रखना चाहता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसकी संप्रभुता को चुनौती दी जाएगी और वह चुप बैठा रहेगा। भारत का संदेश साफ था कि सुरक्षा के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेगा और हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देगा।