ट्रम्प की तारीफ वाले विज्ञापनों पर सरकारी खर्च से विवाद, अब PAC से होगा खर्च
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की तारीफ करने वाले विज्ञापनों पर सरकारी पैसा खर्च होने से अमेरिका में सियासी विवाद छिड़ गया।
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों और कामकाज की तारीफ करने वाले विज्ञापनों पर सरकारी फंड से हुए खर्च को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इन विज्ञापनों के लिए करदाताओं का पैसा इस्तेमाल हुआ, इसलिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों की तरफ से सवाल उठाए गए।
ट्रम्प प्रशासन की नीतियों का समर्थन करने वाले ये विज्ञापन अलग-अलग माध्यमों में छपे। आरोप लगाया गया कि इनमें प्रशासन के कामकाज और ट्रम्प के फैसलों की तारीफ की गई है। चूंकि इनका खर्च सरकारी फंड से हो रहा था, इसलिए इस पर सवाल खड़े हुए।
आलोचना यह रही कि करदाताओं से आने वाला पैसा जनता के कामों में लगना चाहिए। उसे किसी भी राजनीतिक नेता के प्रचार पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए। खास बात यह है कि आपत्ति सिर्फ डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से नहीं आई। रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने भी इस पर ऐतराज जताया।
विपक्ष की दलील थी कि सरकारी फंड का इस्तेमाल किसी राष्ट्रपति की राजनीतिक छवि चमकाने के लिए नहीं होना चाहिए। बढ़ती आलोचना के बीच ट्रम्प ने अब कहा है कि ऐसे विज्ञापनों का खर्च उनकी राजनीतिक एक्शन कमेटी, यानी PAC, से किया जाएगा।
PAC का मतलब है Political Action Committee। अमेरिका में ऐसी राजनीतिक एक्शन कमेटियां राजनीतिक मकसद के लिए पैसा जुटा सकती हैं और उसे प्रचार से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों में लगा सकती हैं। इसलिए आगे ट्रम्प के समर्थन में बनने वाले विज्ञापनों का खर्च सरकारी तंत्र की जगह उनके राजनीतिक फंड से उठाए जाने की संभावना है।
इस मामले ने अमेरिका में सरकारी पैसे और राजनीतिक प्रचार के बीच की लकीर पर फिर बहस छेड़ दी है। मुद्दा यह उठ रहा है कि राष्ट्रपति की नीतियों की जानकारी देने वाले सरकारी विज्ञापन और किसी नेता की छवि ऊंची करने वाले प्रचार विज्ञापन के बीच साफ फर्क होना चाहिए।
विरोधियों के मुताबिक करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए। दूसरी तरफ समर्थकों का कहना हो सकता है कि प्रशासन की नीतियां जनता तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन जरूरी हैं। फिलहाल दोनों पार्टियों के विरोध के बाद ट्रम्प ने खर्च PAC की तरफ मोड़ने का रुख अपनाया है, इसलिए माना जा रहा है कि यह विवाद कुछ शांत पड़ सकता है।