अहिल्यानगर में सूखे की मार, 95 साल के किसान सुधाकर शिंदे बोले, ऐसा अकाल कभी नहीं देखा
अहिल्यानगर जिले के 95 साल के किसान सुधाकर शिंदे ने कहा कि पानी और चारा नहीं मिला तो इंसान और जानवर दोनों मर जाएंगे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अहिल्यानगर जिले में सूखे की हालत बेहद गंभीर हो गई है। एक तरफ सरकारी बैठकें चल रही हैं, घोषणाओं की भरमार है और प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठकें हो रही हैं। दूसरी तरफ खेत की मेड़ पर भयावह सच्चाई सामने खड़ी है। यह बात जिले के 95 साल के किसान सुधाकर शिंदे की पुकार से एक बार फिर सामने आई है।
शिंदे ने कहा, "मेरी उम्र 95 साल है, मैंने अब तक पांच सूखे देखे हैं। लेकिन पीने के पानी और चारे का ऐसा भीषण सूखा मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखा।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने वक्त पर पानी और मदद नहीं पहुंचाई, तो इंसान और मवेशी दोनों मर जाएंगे। उनकी इस नाराज और तीखी पुकार से प्रशासन के कागजी दावों की पोल खुलती दिख रही है।
शिंदे ने पुराने और आज के सूखे का फर्क भी बताया। उनके मुताबिक पहले जब सूखा पड़ता था, तब भी कहीं न कहीं पीने के पानी का इंतजाम हो जाता था। आज हालत यह है कि इंसानों के लिए पीने का पानी नहीं है, और जानवरों के लिए न चारा बचा है न पानी। इसी बात पर उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर किया।
सरकार की तरफ से सूखे के निरीक्षण और पंचनामे के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन शिंदे के मुताबिक खेतों में तस्वीर बिल्कुल अलग है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकारी अधिकारी फसल दर्ज करने खेत तक आते हैं, तो उन्होंने कहा कि अधिकारी गांव में आते हैं, पर खेत में नहीं आते। वे कहते हैं कि ऐप से मोबाइल पर दर्ज कर लो। शिंदे ने सवाल किया कि मेरे जैसे 95 साल के बुजुर्ग को क्या मोबाइल चलाना आता है? उनका कहना है कि अधिकारियों को खुद खेत में आकर फसलों की जांच करनी चाहिए और उन्हें दर्ज करना चाहिए।
पशुओं की गिनती को लेकर शिंदे ने बताया कि कल एक आदमी आया था। उनके पास 10 मवेशी हैं, उसने दर्ज कर लिया और कहा कि "मैं आज ही आया हूं, कल नहीं आऊंगा"। शिंदे का कहना है कि इस तरह जल्दबाजी में काम निपटाकर अधिकारी चले जाते हैं और किसानों की समस्या समझने के लिए खेत पर कोई नहीं रुकता।
फसलों का हाल भी बुरा है। बारिश न होने से खेत की फसलें पूरी तरह खत्म हो गई हैं। शिंदे ने बताया कि खेत से निकाले गए चने की फसल से एक-दो बोरी अनाज तो दूर, जानवरों के लिए भूसा तक नहीं निकल रहा। फसलें सूख जाने से किसान पूरी तरह टूट गया है।
शिंदे ने जिले के प्रभारी मंत्री की बैठकों पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि एक तरफ समीक्षा बैठकें लेकर हालात ठीक होने का आभास दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ गांवों में पानी की एक बूंद नहीं है। सरकारी आंकड़ों और खेत की असलियत के बीच बड़ी खाई बन गई है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर हालात यही रहे और सरकार ने तुरंत पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा और आर्थिक मदद नहीं पहुंचाई, तो आने वाले दिनों में पानी और चारे की कमी से जानवरों के साथ इंसानों की भी जान जाएगी। अब पूरे जिले की नजर इस पर है कि क्या इस पुकार के बाद सरकार और प्रशासन जागकर तुरंत राहत छावनियां और पानी के टैंकर शुरू करेंगे।