आंगनवाड़ी सेविकाओं के प्रोत्साहन भत्ते के नियम बदलेंगे, मंत्री आदिती तटकरे ने दिए निर्देश
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महिला और बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने मंत्रालय की बैठक में अधिकारियों को संशोधित प्रस्ताव तुरंत तैयार करने को कहा है।
महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को मिलने वाले प्रोत्साहन भत्ते के नियम अब बदले जाएंगे। महिला व बालविकास मंत्री आदिती तटकरे ने इसके लिए अधिकारियों को अहम निर्देश दिए हैं।
कर्मचारी संगठन काफी समय से मांग कर रहे थे कि प्रोत्साहन भत्ते के मानदंडों में सुधार किया जाए। इसी को देखते हुए मंत्रालय में एक खास बैठक बुलाई गई थी।
बैठक में मंत्री तटकरे ने साफ कहा कि भत्ता तय करते वक्त कुछ बातों को आधार बनाया जाए। ये बातें हैं पोषण, सेहत, स्कूल से पहले की पढ़ाई, लाभार्थियों की हाजिरी और नियमित घर-घर जाकर मुलाकात यानी घर-घर जाकर मुलाकात। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से यह भी कहा कि इस बारे में पूरा और संशोधित प्रस्ताव फौरन तैयार किया जाए।
मंत्रालय में हुई इस ऊंचे स्तर की बैठक में एकात्मिक बालविकास सेवा योजना की आयुक्त माधवी सरदेशमुख और सहसचिव वी. रा. ठाकूर मौजूद थे। महिला व बालविकास विभाग के दूसरे वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
राज्य में इस वक्त 0 से 6 साल के बच्चों, साथ ही गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं की सेहत और पोषण का ख्याल रखने के लिए बड़ा तंत्र काम कर रहा है। महाराष्ट्र में अभी 1,08,627 आंगनवाड़ी सेविकाएं और 1,05,470 आंगनवाड़ी सहायिकाएं यह काम संभाल रही हैं।
इन सभी कर्मचारियों को उनके काम की गुणवत्ता के हिसाब से प्रोत्साहन भत्ता मिलता है। यह भत्ता 1 अक्टूबर 2024 से लागू किया गया है। आंगनवाड़ी सेविकाओं को हर महीने 1500 रुपये से 2000 रुपये मिलते हैं, जबकि आंगनवाड़ी सहायिकाओं को हर महीने 500 रुपये से 1000 रुपये मिलते हैं। अब इस भत्ते के बंटवारे और काम के मूल्यांकन के मानदंडों को ज्यादा सीधा-सरल और आज के हिसाब से बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक में सिर्फ प्रोत्साहन भत्ते पर ही बात नहीं हुई। एकात्मिक बालविकास सेवा योजना आयुक्तालय की तरफ से चलाई जा रही दूसरी कल्याणकारी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इनमें खास तौर पर अतिरिक्त आहार योजना, आदर्श आंगनवाड़ी योजना और बेबी केयर किट योजना का जायजा लिया गया।
मंत्री आदिती तटकरे ने अधिकारियों को बताया कि आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में इन सभी योजनाओं को असरदार तरीके से कैसे लागू किया जाए। इसके लिए उन्होंने जरूरी निर्देश भी दिए। उम्मीद जताई जा रही है कि इन सुधारों से आंगनवाड़ी कर्मचारियों के काम की सही कदर होगी और उनकी कार्यक्षमता और बढ़ेगी।
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