पत्नी से संबंध न होने का दावा करने वाले पति पर 50 हजार का जुर्माना, बेटे की DNA जांच की मांग खारिज
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मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने बेटे के पितृत्व पर सवाल उठाने वाले पति की याचिका खारिज कर दी।
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक ऐसे पति को झटका दिया है, जिसने कहा था कि पत्नी से उसके शारीरिक संबंध नहीं थे, फिर बेटा कैसे पैदा हुआ। पति ने इसी आधार पर बेटे की DNA जांच कराने की मांग की थी। कोर्ट ने यह मांग मंजूर नहीं की और पति पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
जस्टिस शमीम अहमद ने पति की क्रिमिनल रिविजन पिटीशन खारिज कर दी। मामला घरेलू हिंसा के एक पेंडिंग केस से जुड़ा है। उस केस में मजिस्ट्रेट ने पहले ही DNA जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था। पति ने मजिस्ट्रेट के इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए कि माता-पिता को एक-दूसरे पर शादी के बाहर संबंधों के आरोप साबित करने हैं, बच्चे की पहचान और उसकी निजता के हक की बलि नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि मां ने पिता से बेईमानी की, यह साबित करने के लिए बच्चे को मोहरे की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया पत्नी का अपमान करने और समाज में उसकी इज्जत खराब करने के मकसद से शुरू की गई थी। कोर्ट ने यह भी बताया कि वैध शादी के दौरान पैदा हुए बच्चे को कानून की नजर में वैध माना जाता है, और इस प्रावधान की अहमियत पर जोर दिया।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चे को कानूनी तौर पर वैध मानने वाली इस धारणा को चुनौती देने के लिए पति के पास कोई ठोस आधार नहीं था। इसी वजह से याचिका टिक नहीं सकी और पति को 50 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा।
यह मामला मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में सुना गया। पति की दलील थी कि पत्नी से संबंध नहीं थे, इसलिए बेटे के पिता होने पर सवाल बनता है। कोर्ट ने इस दलील को आधार नहीं माना और मजिस्ट्रेट का फैसला बरकरार रहा।
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