हर बच्चे को मिले परिवार का सहारा, दिल्ली में बोलीं मंत्री आदिती तटकरे
महिला व बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने दिल्ली की क्षेत्रीय शिखर परिषद में अनाथ बच्चों की नौकरी, बाल संगोपन योजना, गोद लेने और आफ्टर केयर पर महाराष्ट्र की जानकारी रखी।
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महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि हर बच्चे को सुरक्षित परिवार, प्यार और ठीक से देखभाल मिले। इसके लिए राज्य बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दे रही है। महिला व बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि संस्था में रखकर देखभाल करने के बजाय परिवार और समुदाय पर आधारित विकल्पों को पहले रखना होगा। इसके तहत फॉस्टर केयर, गोद लेने की प्रक्रिया और आफ्टर केयर को ज्यादा असरदार बनाने की जरूरत है।
तटकरे ने यह बात नई दिल्ली में केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय की तरफ से आयोजित दो दिन की क्षेत्रीय शिखर परिषद में रखी। वहां वे महाराष्ट्र की पहलों की जानकारी दे रही थीं।
अनाथ बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में एक फीसदी समानांतर आरक्षण लागू है। मंत्री की दी जानकारी के मुताबिक सितंबर 2026 तक इस आरक्षण से 1 हजार 60 बच्चों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। इनमें वर्ग एक के 4, वर्ग दो के 68, वर्ग तीन के 974 और वर्ग चार के 14 उम्मीदवार हैं।
राज्य में अब तक करीब 12 हजार 443 अनाथ प्रमाणपत्र बांटे जा चुके हैं। इसके अलावा अनाथ बच्चों की उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और परीक्षा फीस का पूरा खर्च राज्य सरकार उठा रही है। 17 जुलाई 2025 को लिए गए फैसले का फायदा 99 से ज्यादा विद्यार्थियों को मिल चुका है।
क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना के तहत करीब दो लाख बच्चों को हर महीने 2 हजार 250 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। झुग्गी बस्तियों और सड़कों पर रहने वाले बच्चों के लिए 'फिरते पथक' नाम की एक पायलट पहल चलाई गई। 2024-25 में इसके जरिए करीब 10 हजार बच्चों तक पहुंचा गया।
इनमें से तीन हजार बच्चों को नियमित स्कूलों में दाखिला दिलाया गया। यह पहल अब राज्य के 39 से ज्यादा नगर निगमों में फैलाई जा रही है। जिला वार्षिक योजना में महिला व बाल विकास के लिए रखे गए फंड का इस्तेमाल बुनियादी सुविधाओं, आंगनवाड़ियों और बच्चों के कल्याण के कामों में हो रहा है।
गोद लेने के लिए करीब 20 से 25 हजार आवेदक रजिस्टर्ड हैं। फिर भी ज्यादातर माता-पिता एक से दो साल से छोटे बच्चे को गोद लेना पसंद करते हैं। इस वजह से बड़ी उम्र के बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में देर होती है।
बच्चों को कानूनी तौर पर गोद लेने के लिए मुक्त घोषित करने में होने वाली देरी, फॉस्टर परिवारों की कमी और 18 साल के बाद पढ़ाई, रोजगार, रहने की जगह और कौशल विकास के लिए जरूरी मदद, ये मुख्य चुनौतियां हैं।
तटकरे ने इसके हल के तौर पर कुछ बातें बताईं। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) और मिशन वात्सल्य के बीच तालमेल बढ़ाना होगा। अटके हुए मामलों का पीछा करना होगा। और बच्चे के 18 साल का होने से कम से कम 12 महीने पहले ही आफ्टर केयर और आत्मनिर्भरता की योजना बनानी होगी।
उन्होंने यह भी साफ किया कि अधिकारों का विकेंद्रीकरण करके स्थानीय स्तर के अधिकारियों को सक्षम बनाया जाए, तो योजनाओं का फायदा आखिरी तबके तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।