आणे गांव में डेढ़ महीने से नल सूखे, ग्रामपंचायत की 29 अक्टूबर को रास्ता रोको की चेतावनी
बेल्हे प्रादेशिक पानी आपूर्ति योजना 9 सितंबर से बंद है। ग्राम पंचायत ने सप्लाई जल्द ठीक न होने पर 29 अक्टूबर को रास्ता रोको की चेतावनी दी है।
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आणे गांव के लोग इन दिनों पीने के पानी के लिए बुरी तरह परेशान हैं। इस साल बारिश ने दगा दिया है और सूखे का असर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में गांव को पानी देने वाली बेल्हे प्रादेशिक जलापूर्ति योजना 9 सितंबर से पूरी तरह बंद पड़ी है। ग्राम पंचायत ने साफ कह दिया है कि पानी की सप्लाई जल्द ठीक नहीं हुई तो 29 अक्टूबर को रास्ता रोको आंदोलन किया जाएगा।
आणे के आबादी इलाके को जिस कुएं से पानी मिलता है, उसका जलस्तर कम बारिश की वजह से लगातार नीचे जा रहा है। गांव के पास पीने के पानी का कोई दूसरा भरोसेमंद जरिया नहीं है, इसलिए पूरा गांव बेल्हे प्रादेशिक योजना पर ही टिका हुआ है। लेकिन यही योजना डेढ़ महीने से ज्यादा वक्त से बंद है, और लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
हालात इसलिए और बिगड़ गए हैं कि बेल्हे प्रादेशिक जलापूर्ति योजना नंबर 2 अभी तक चालू ही नहीं हो पाई है। ग्राम पंचायत की शिकायत है कि संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों को बार-बार जानकारी दी गई, फिर भी पानी की सप्लाई पहले की तरह शुरू नहीं हुई।
बारिश न होने से गांव के पानी के स्रोतों पर पहले ही दबाव था। ऊपर से रोज का पानी देने वाली प्रादेशिक योजना बंद होने से महिलाओं, बुजुर्गों और बाकी गांववालों को पानी जुटाने में बहुत मशक्कत करनी पड़ रही है। गांववालों में गुस्सा है और वे कह रहे हैं कि पानी दो, वरना हम सड़क पर उतरेंगे।
ग्राम पंचायत ने इस मसले पर फौरन ध्यान देने और पानी की सप्लाई ठीक करने की मांग महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण से की है। इसके लिए जिलाधिकारी, उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, मौजूदा विधायक शरद सोनवणे और खंड विकास अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी भेजा गया है।
आणेपठार के ग्रामीणों की तरफ से प्रशासन को चेताया गया है कि सूखे के हालात में पीने के पानी की समस्या और गंभीर होने से पहले तुरंत उपाय किए जाएं। ऐसा नहीं हुआ तो 29 अक्टूबर को रास्ता रोको आंदोलन होगा।
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