हिमालय की बर्फ तेजी से पिघल रही, करोड़ों लोगों की पानी की सप्लाई पर खतरा
नए स्टडी में हिमालय की हिमनदियों के तेजी से पिघलने को लेकर चेतावनी दी गई है, जिसका सीधा असर भविष्य में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
हिमालय को धरती का 'तीसरा ध्रुव' कहा जाता है, क्योंकि इन पहाड़ों में भारी मात्रा में बर्फ और हिमनदियां जमा हैं। भारत समेत एशिया के कई देशों के करोड़ों लोग इन्हीं हिमनदियों से पिघलने वाले पानी पर निर्भर हैं। लेकिन एक नए स्टडी में सामने आया है कि हिमनदियां तेजी से पिघल रही हैं, और इसका सीधा असर आने वाले वक्त में पानी की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि हिमालय एक निर्णायक मोड़ की तरफ बढ़ रहा है।
हिमालय में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम की वजह से हिमनदियों के पिघलने की रफ्तार बढ़ती जा रही है। ये हिमनदियां सिर्फ बर्फ के पहाड़ नहीं हैं, बल्कि एशिया की कई बड़ी नदियों के लिए पानी का अहम सोर्स हैं। गर्मी के मौसम में बर्फ पिघलने से नदियों में पानी का बहाव बना रहता है।
लेकिन अगर हिमनदियां लगातार कम होती गईं, तो शुरुआत में नदियों में पानी की मात्रा बढ़ सकती है। इसके बाद जब बर्फ का भंडार घट जाएगा, तो पानी की नेचुरल सप्लाई ही कम होने का खतरा पैदा हो जाएगा। इसका असर आगे चलकर पीने के पानी, खेती और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स पर बड़े पैमाने पर पड़ सकता है।
हिमालय के पानी पर पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों तक बड़ी आबादी की जिंदगी टिकी हुई है। खेती, पशुपालन, हाइड्रो पावर बनाने और लोकल इंडस्ट्री के लिए नदियों का पानी बेहद जरूरी है। अगर हिमनदियों में भारी कमी आई, तो इन सभी क्षेत्रों के सामने पानी का संकट खड़ा हो सकता है।
खासकर हिमालय की तलहटी में और नदी घाटियों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है। पानी की उपलब्धता कम हुई तो खेती का उत्पादन घट सकता है और कई परिवारों की कमाई पर असर पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हिमालय की कुछ हिमनदियां ऐसे मुकाम पर पहुंच सकती हैं, जहां से उनका खत्म होना और तेज हो सकता है। इसी को 'टिपिंग पॉइंट' कहा जाता है। यह मोड़ आने के बाद हिमनदियों में बर्फ का भंडार कम होता गया तो आगे चलकर पानी के बहाव को कंट्रोल में रखना और मुश्किल हो सकता है।
इस वजह से हिमालय में हो रहे पर्यावरण बदलावों का असर सिर्फ पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया की पानी की सुरक्षा पर इसका असर पड़ सकता है। इसीलिए हिमनदियों पर लगातार नजर रखना, पानी का सही प्लानिंग करना और मौसम में बदलाव की रफ्तार कम करने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी हो गया है। हिमालय की बर्फ पिघलने की यह घंटी आगे चलकर बड़े जल संकट की चेतावनी बन सकती है।