17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन दिवस: सिर्फ पैसे की नहीं, इज्जत से जीने के हक की लड़ाई
हर साल 17 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस का मकसद गरीबी के चक्र में फंसे लोगों की आवाज सुनना और उनके बुनियादी मानव अधिकार बचाना है।
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हर साल 17 अक्टूबर को पूरी दुनिया में 'अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस' (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया जाता है। इस दिन का मकसद दुनिया भर में फैली गरीबी के बारे में लोगों को जागरूक करना है। साथ ही गरीबी के चक्र में फंसे लोगों की बात सुनना और उनके बुनियादी इंसानी हक की हिफाजत करना भी इसका मकसद है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) ने 22 दिसंबर 1992 को औपचारिक प्रस्ताव पास किया था। उसी प्रस्ताव के जरिए 17 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरीबी उन्मूलन दिवस घोषित किया गया। तब से हर साल यह दिन एक खास थीम के साथ मनाया जाता है, और उस थीम से दुनिया भर में गरीबी हटाने की नीतियों को दिशा मिलती है।
गरीबी की बात आती है तो ज्यादातर लोगों का ध्यान कम आमदनी या पैसों की कमी पर जाता है। लेकिन इंसानी हक के नजरिए से देखें तो गरीबी सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं है। यह एक उलझी हुई हालत है, जो इंसान के वजूद को ही चुनौती देती है। गरीबी की वजह से आदमी अच्छी तालीम, सही सेहत सुविधाएं, साफ पीने का पानी और सुरक्षित छत से दूर रह जाता है। सबसे अहम बात यह कि उसे समाज में इज्जत से जीने के हक से भी वंचित रहना पड़ता है। जब कोई परिवार भूखे पेट सोता है या इलाज न मिलने से किसी की जान चली जाती है, तो वह सिर्फ पैसों की नाकामी नहीं होती। वह हमारे सामाजिक और आर्थिक सिस्टम की नाकामी होती है।
गरीबी हटाने की सोच में सामाजिक न्याय और सबके लिए बराबर मौके तय करना बेहद जरूरी माना गया है। गरीबी से पैदा होने वाली सामाजिक गैरबराबरी, असमानता को और बढ़ा देती है। इसी वजह से दुनिया में और भारत में अलग-अलग स्तर पर खास मुहिमें, जागरूकता कार्यक्रम और नीतियों पर चर्चाएं होती हैं। गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को मजबूत बनाने के लिए रोजगार के मौके देना, गुणवत्ता वाली शिक्षा देना और सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना जरूरी है। जब हर नागरिक को अपनी क्षमता के हिसाब से काम करने और आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलेगा, तभी सही मायनों में गरीबी को हराया जा सकेगा।
गरीबी मिटाने का इतना बड़ा काम अकेले सरकार या किसी एक संस्था के भरोसे पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए सरकार, सामाजिक संस्थाएं, कॉर्पोरेट सेक्टर (CSR) और हर समझदार नागरिक को साथ आकर काम करना होगा। सरकारी योजनाओं को ठीक से लागू करना और मदद को नीचे तक पहुंचाना जरूरी है। गरीबों को मदद पर निर्भर बनाने के बजाय उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना आज की जरूरत है। कोई भूखा न रहे, किसी के सिर पर छत की कमी न हो और हर किसी को इज्जत की जिंदगी मिले, इसके लिए मिलकर पूरी ताकत लगाना ही इस दिन का असली मतलब है।