जयशंकर ने CELAC बैठक में रखा भारत के दस साल में जीडीपी दोगुना होने का हिसाब
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र आमसभा के दौरान हुई CELAC विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी और पिछले दस साल की तरक्की का ब्योरा पेश किया।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की आमसभा के इर्द-गिर्द आयोजित लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों के समुदाय यानी CELAC की विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने अपने बढ़ते वैश्विक असर और अपनी प्रतिबद्धता को फिर से सामने रखा। इस अहम बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उरुग्वे के विदेश मंत्री मारिओ लुबेटकिन ने की।
बैठक को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत के तौर पर भारत का उभरना सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की तरक्की और खुशहाली के लिए एक बड़ी ताकत बनकर सामने आ रहा है।
विदेश मंत्री ने पिछले दस साल में भारत की जबरदस्त तरक्की का पूरा हिसाब वहां मौजूद लोगों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि पिछले दस साल में भारत का जीडीपी दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा है और देश की विकास दर लगातार मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उनके मुताबिक आज भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा और तेजी से हुनरमंद बनता मानव संसाधन, भारी क्षमता वाला घरेलू बाजार, मजबूत डिजिटल ढांचा और लगातार बढ़ती तकनीकी क्षमता मौजूद है। जयशंकर के मुताबिक इसी ताकत की वजह से भारत वैश्विक तरक्की का बड़ा इंजन बन गया है और विकासशील देशों की अलग-अलग मोर्चों पर मदद करने में पूरी तरह सक्षम है।
अपने भाषण में जयशंकर ने खासतौर पर कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की साझेदारी किसी संकीर्ण राष्ट्रीय हित या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय एकता और साझी खुशहाली को लेकर भारत की पुरानी सोच और वचनबद्धता की निशानी है। उन्होंने कहा कि जब-जब इस इलाके के देशों पर प्राकृतिक या मेडिकल संकट आया, भारत ने भाईचारे की भावना से तुरंत मदद के कदम उठाए हैं।
इसकी मिसाल के तौर पर उन्होंने पिछले साल जमैका में आए भयानक मेलिसा चक्रवात और इस साल वेनेजुएला में आए बड़े भूकंप का जिक्र किया। जयशंकर के मुताबिक भूकंप के बाद वेनेजुएला में फौरन सैन्य अस्पताल भेजना हो या चक्रवात से तबाह कैरिबियाई देशों के लोगों की रोजी-रोटी के लिए राहत प्रोजेक्ट चलाना हो, भारत ने हमेशा आगे बढ़कर पहल की है। इसके अलावा लैटिन अमेरिका के कई देशों को वक्त पर जरूरी जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाकर भारत ने अपनी "दुनिया की फार्मेसी" वाली पहचान को साबित किया है।
CELAC के 33 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की इस उच्चस्तरीय बैठक में आगे की आर्थिक और तकनीकी साझेदारी पर विस्तार से बातचीत हुई। भारत ने कहा कि भारत और CELAC देश एक-दूसरे के लिए बेहतरीन साथी हैं क्योंकि भारत के पास एडवांस टेक्नोलॉजी, फार्मास्युटिकल सेक्टर, हुनरमंद मानव संसाधन और डिजिटल क्षमता है, वहीं CELAC इलाके में दुर्लभ खनिज, टिकाऊ ऊर्जा, खेती और खाने-पीने के संसाधनों का बड़ा भंडार है। दोनों तरफ बढ़ते मध्यम वर्ग की वजह से व्यापार और निवेश के भारी मौके पैदा हुए हैं।
बैठक में शामिल सभी मंत्री सेहत, फार्मास्युटिकल, खाने-पीने और खेती, ऊर्जा और संसाधन, छोटे-मझोले उद्योगों (MSMEs) और डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमत हुए। भारत ने बताया कि व्यापार को आसान बनाने के लिए चिली के साथ प्रस्तावित सर्वसमावेशक आर्थिक भागीदारी करार (CEPA), पेरू के साथ मुक्त व्यापार करार (FTA) और MERCOSUR के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर तेजी से काम चल रहा है।
इसके अलावा CELAC देशों ने पर्यावरण और जलवायु बदलाव की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की शुरू की गई वैश्विक पहलों को पूरा समर्थन दिया है। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI), इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA), ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ शामिल हैं। भारत के मुताबिक इसके ये कदम दुनिया भर में एक संतुलित, सबको साथ लेकर चलने वाली और न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने में बेहद अहम साबित हो रहे हैं।