पहले ठीक से खाना बनाना नहीं आता था, आज शेफ के तौर पर पहचान बना चुकीं आरती निजापकर
आरती निजापकर को शुरू में खाना बनाना नहीं आता था। होटल मैनेजमेंट पढ़ने, शादी के बाद होटल इंडस्ट्री छोड़ने और फिर एमएससी करने तक उन्होंने अपना करियर जारी रखा।
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कई लोगों को खाना बनाने का शौक होता है और कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें किचन का नाम सुनते ही टेंशन होने लगता है। अब सोचिए, जिस लड़की को कभी सादा खाना भी ठीक से बनाना नहीं आता था, वही आगे चलकर कामयाब शेफ बन जाए। शेफ आरती निजापकर की कहानी कुछ ऐसी ही है।
होटल इंडस्ट्री को पुरुषप्रधान माना जाता है। ऐसे में वहां अपनी पहचान बनाना, शादी के बाद भी करियर चलाते रहना और नई चुनौतियों का सामना करना आसान नहीं होता। आरती निजापकर ने यह सफर तय किया और खाना पकाने की कला में अपनी अलग पहचान बनाई। नवदुर्गा नाम के एक खास पॉडकास्ट में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि होटल इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने कौन सी चुनौतियां आती हैं, शादी के बाद करियर कैसे जारी रखा जा सकता है और कम पैमाने पर खाने का कारोबार कैसे शुरू किया जा सकता है।
शुरुआत में आरती को खाना बनाना ज्यादा आता नहीं था। उनकी मां काम पर जाती थीं, इसलिए वे अपनी दादी और मौसी से पूछ-पूछकर खाना बनाती थीं। उन्हीं से अलग-अलग चीजें सीखते हुए उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की। धीरे-धीरे उन्हें इस कला का शौक लग गया और फिर उन्होंने इसी क्षेत्र में पढ़ाई करने का फैसला किया। जिस चीज की शुरू में उन्हें खास जानकारी नहीं थी, उसी से आगे चलकर उनकी पहचान बनेगी, इसका उन्हें अंदाजा तक नहीं था।
आरती ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। उनके मुताबिक पढ़ाई के दौरान ही उन्हें साफ था कि आगे किस क्षेत्र में काम करना है और करियर कैसे बनाना है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र चुनते वक्त सिर्फ डिग्री ले लेना काफी नहीं होता, यह भी सोचना जरूरी है कि उस पढ़ाई के सहारे आगे क्या करना है। शादी के बाद भी करियर चलता रहे, यह बात शुरू से उनके मन में थी, इसलिए उन्होंने पढ़ाई और आगे के पेशेवर भविष्य को देखकर अपना रास्ता चुना।
पढ़ाई पूरी होने के बाद आरती ने होटल इंडस्ट्री में काम किया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। यहां करियर बनाना आसान नहीं है और इसके लिए काम का शौक, टिके रहने की जिद और मेहनत की तैयारी चाहिए। उन्होंने यह बात भी रखी कि महिलाओं को करियर चुनते समय अपनी पसंद और आगे की जिम्मेदारियों, दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।
शादी के बाद उनकी जिंदगी में अहम मोड़ आया और उन्होंने होटल इंडस्ट्री का काम छोड़ दिया। लेकिन उन्होंने इसे करियर छोड़ना नहीं माना। शादी के बाद भी पढ़ाई और पेशेवर तरक्की जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि आगे उन्होंने एमएससी की पढ़ाई की।
जो महिलाएं फूड इंडस्ट्री में अपना काम शुरू करना चाहती हैं, उनके लिए आरती ने डिब्बा व्यवसाय का रास्ता सुझाया। उनके मुताबिक डिब्बा सर्विस से यह अंदाजा लग जाता है कि कितना खाना लगता है और ग्राहकों की जरूरत क्या है। कोई दो चपाती खाता है या एक रोटी, रोटी के साथ कितना चावल लेता है, ऐसी छोटी बातें देखकर खाने की प्लानिंग की जा सकती है। इसलिए उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करते वक्त ग्राहक की जरूरत समझना और उसी हिसाब से खाना बनाना जरूरी है।
आरती का कहना है कि इस कारोबार में सिर्फ अच्छा खाना बनाना काफी नहीं होता। यह भी सोचना पड़ता है कि ग्राहक कितना खाते हैं, कितनी मात्रा में बनाना है और मौजूद सामान का सही इस्तेमाल कैसे करना है। उनके उदाहरण के मुताबिक डिब्बा व्यवसाय में हर ग्राहक के लिए कितनी चपाती, रोटी और चावल चाहिए, यह समझना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसी अनुभव से आगे बड़े पैमाने पर खाने की प्लानिंग की समझ बन सकती है।
आरती के सफर का एक अहम पहलू यह है कि हालात के हिसाब से करियर में बदलाव के लिए वे तैयार रहीं। होटल इंडस्ट्री में काम के बाद शादी की वजह से उनके पेशेवर जीवन में बदलाव आया, पर उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और खाना पकाने की कला से अपना रिश्ता बनाए रखा। उनके अनुभव से यह बात उभरती है कि करियर का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता और जिंदगी के अलग-अलग मोड़ पर बदलाव अपनाकर नए मौके तलाशना भी जरूरी है।
नवदुर्गा पॉडकास्ट में शेफ आरती निजापकर ने अपनी पढ़ाई, होटल इंडस्ट्री के अनुभव, शादी के बाद के करियर और खाने का कारोबार शुरू करने के बारे में बताया। खाना बनाने की ज्यादा जानकारी न होने के बावजूद खाना पकाने की कला की पढ़ाई करके अपनी पहचान बनाने वाली आरती का सफर इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहने वाली युवतियों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।