मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:49 IST

यूएनजीए में रूस ने कहा, सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूएन महासभा में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का जोरदार समर्थन किया, वहीं मॉरिशस और पुर्तगाल ने भी भारत के पक्ष में बात रखी।

यूएनजीए में रूस ने कहा, सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनिया के मंच पर भारत का बढ़ता असर एक बार फिर सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र में बोलते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को खुलकर समर्थन दिया। लावरोव ने साफ कहा कि आज की दुनिया की हकीकत को देखते हुए भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलना बहुत जरूरी है।

महासभा को संबोधित करते हुए लावरोव ने दुनिया की व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार करते वक्त परिषद के मूल अधिकार और उसके स्थायी सदस्यों के विशेष अधिकार कम नहीं होने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका जैसे विकासशील इलाकों की भागीदारी बढ़ाना आज के वक्त की जरूरत है। रूस के मुताबिक, भारत जैसे मजबूत और जिम्मेदार देश को स्थायी सदस्यता मिलना दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए बहुत अहम है।

अपने भाषण में लावरोव ने पश्चिमी देशों के बढ़ते दखल और उनकी भागीदारी पर सख्त चेतावनी दी। उनका कहना था कि सुरक्षा परिषद में होने वाले संभावित सुधारों में पश्चिमी देशों को और स्थायी सीटें देना पूरी तरह गलत होगा, यह मॉस्को का सैद्धांतिक रुख है। जर्मनी और जापान को स्थायी सीट देने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ये दोनों देश फिलहाल फिर से मिलिट्रीकरण और बदले की भावना की राह पर चल रहे हैं। इसलिए पश्चिमी देशों का असर और बढ़ाने के बजाय ग्लोबल साउथ के देशों को ज्यादा मौका दिया जाना चाहिए।

रूस का मानना है कि एशिया से भारत और लातिन अमेरिका से ब्राजील स्थायी सदस्यता के लिए पूरी तरह हकदार हैं। इसके साथ ही अफ्रीकी महाद्वीप के देशों के हित और उनके सही अधिकारों का ख्याल रखते हुए उन्हें भी सुरक्षा परिषद में सही भागीदारी मिलनी चाहिए, इस पर रूस ने खास जोर दिया।

सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट पाने के लिए भारत की कोशिशों का असर अब दिखने लगा है। रूस के अलावा दुनिया के कई और अहम देशों ने भारत की इस मांग का खुलकर समर्थन किया है। मॉरिशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने महासभा में बोलते हुए साफ किया कि उनका देश सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-4 (G4) और एल-69 (L69) गुटों की भूमिका का समर्थन करता है। रामफुल ने कहा कि दुनिया के मामलों में भारत की सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका को देखते हुए भारत स्थायी सदस्यता के लिए पूरी तरह सही उम्मीदवार है।

इसके अलावा पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मॉन्टेनेग्रो ने भी सुरक्षा परिषद में जल्द से जल्द ढांचागत सुधार की जरूरत बताते हुए भारत के दावे का समर्थन किया। दुनिया भर में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, शांति स्थापना अभियानों में उसकी भागीदारी और बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व, इन सब वजहों से भारत का दावा दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।

फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, ये पांच देश ही स्थायी सदस्य हैं। इन पांच देशों के पास खास वीटो पावर है। इनके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

मगर 1945 के हालात और आज की दुनिया की हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क आ गया है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र की इस सबसे बड़ी संस्था में जल्द सुधार करके भारत, ब्राजील जैसे उभरते हुए बड़े देशों को स्थायी सदस्यता देने की मांग दुनिया भर में तेज हो रही है। रूस के इस पक्के रुख से भारत की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ी रफ्तार मिली है।

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