101 साल का हुआ संघ: नागपुर की छोटी शुरुआत से 40 प्रमुख संगठनों के परिवार तक
विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्थापना दिवस है। संघ लगभग 35 से 40 अनुषांगिक संगठनों को मान्यता देता है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को बने आज 101 साल हो गए। आज विजयादशमी है और यही संघ का स्थापना दिवस है। साल 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर के मोहिते बाड़े में सिर्फ 17-18 युवाओं को साथ लेकर संघ की नींव रखी थी। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह संगठन आगे चलकर भारत के सामाजिक और राजनीतिक माहौल की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा।
बहुत से लोग संघ को सुबह की शाखा, लाठी और खाकी पैंट से ही पहचानते हैं। पर आज आरएसएस एक विचार बन चुका है और उसका असर समाज के हर क्षेत्र में दिखता है। संघ सीधे राजनीति या आंदोलनों में नहीं उतरता। इसके लिए उसने अलग-अलग क्षेत्रों में अलग संगठन खड़े किए हैं, जिन्हें मिलाकर 'संघ परिवार' कहा जाता है।
संघ आधिकारिक तौर पर लगभग 35 से 40 मुख्य अनुषांगिक संगठनों को मान्यता देता है। इनके राज्य स्तर के विंग, ट्रस्ट और सहयोगी गैर-सरकारी संगठन (NGO) भी गिन लिए जाएं तो संख्या 2,500 से ज्यादा हो जाती है। राजनीति से लेकर आदिवासी कल्याण तक और स्कूलों से लेकर वैज्ञानिकों के मंच तक, संघ परिवार हर जगह मौजूद है।
राजनीति और छात्र-युवा मोर्चे में भारतीय जनता पार्टी (BJP), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी आते हैं। मजदूर, किसान और अर्थ के मोर्चे पर भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, स्वदेशी जागरण मंच, लघु उद्योग भारती और सहकार भारती हैं। धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, राष्ट्रीय सिख संगत, संस्कार भारती और अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना की गिनती होती है।
शिक्षा में विद्या भारती, भारतीय शिक्षण मंडल और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हैं। सेवा और जनजातीय कल्याण का काम सेवा भारती, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम, भारतीय कुष्ठ निवारण संघ, दीनदयाल शोध संस्थान और सक्षम देखते हैं। इनके अलावा विज्ञान भारती, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन, क्रीड़ा भारती, पूर्व सैनिक परिषद, राष्ट्र सेविका समिति, प्रज्ञा प्रवाह, भारत विकास परिषद, हिंदू जागरण मंच, सीमा जागरण मंच, विश्व संवाद केंद्र, हिंदू स्वयंसेवक संघ और कुटुंब प्रबोधन जैसे नाम भी सूची में हैं।
सवाल उठता है कि क्या संघ इन सब संगठनों को आदेश देता है। तकनीकी तौर पर इसका जवाब है, नहीं। ये सभी संगठन प्रशासन और रणनीति के मामले में पूरी तरह स्वायत्त हैं। हर संगठन का अपना संविधान, अपने पदाधिकारी और अपना बजट होता है। तालमेल बना रहे, इसके लिए संघ अपने अनुभवी और वरिष्ठ प्रचारकों को 'संगठन मंत्री' बनाकर इन संगठनों में भेजता है। ये प्रचारक देखते हैं कि संगठन का काम संघ की बुनियादी विचारधारा, यानी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र-निर्माण से भटके नहीं।
101 साल पूरे होने के बाद संघ परिवार का ध्यान सिर्फ शाखा लगाने पर नहीं है। अब जोर डिजिटल दौर के युवाओं (IT मिलन), आधुनिक विज्ञान (विज्ञान भारती) और दुनिया के मंचों पर भारत के नैरेटिव को मजबूत करने पर है।
नागपुर के रेशमीबाग में आज विजयादशमी का मुख्य समारोह होगा। सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य वक्ता होंगे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और एक इजराइली राजनयिक को विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया गया है। रेशमीबाग से होने वाला सरसंघचालक का सालाना संबोधन संघ परिवार और देश के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह काम करता है।