ज़मीन अपने नाम न हो तो भी मिलेगा फार्मर आईडी, महाराष्ट्र सरकार का फैसला
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महाराष्ट्र सरकार ने किराये पर या करार से खेती करने वाले पात्र किसानों को भी फार्मर आईडी देने का फैसला किया है। इससे वे किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाओं का फायदा ले सकेंगे।
राजस्व रिकॉर्ड में नाम न होने की वजह से फार्मर आईडी से वंचित रहे लाखों किसानों को राज्य सरकार ने राहत दी है। अब किराये पर ज़मीन लेकर खेती करने वाले, करार के आधार पर खेती करने वाले और 1 जनवरी 2015 से पहले से ज़मीन पर असल में खेती कर रहे पात्र किसानों को भी फार्मर आईडी मिलेगा।
यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार ने लिया है। राजस्व विभाग ने सरकारी आदेश जारी कर नई प्रक्रिया तय कर दी है। बताया गया है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर यह निर्णय हुआ। अब तक तकनीकी और राजस्व संबंधी अड़चनों के कारण जो किसान सरकारी योजनाओं से बाहर रह गए थे, वे फार्मर आईडी मिलने के बाद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा सहायता और राज्य सरकार की कई कृषि योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।
पात्रता चार श्रेणियों के किसानों के लिए रखी गई है। पहली श्रेणी में वे किसान हैं जो 1 जनवरी 2015 से पहले से संबंधित ज़मीन पर असल में खेती कर रहे हैं और आज भी उसका कब्ज़ा उनके पास है। इसके लिए कम से कम एक वैध दस्तावेज़ ज़रूरी होगा। दूसरी श्रेणी में आधिकारिक तौर पर किराये पर ज़मीन लेकर खेती करने वाले किसान आते हैं। तीसरी श्रेणी उन किसानों की है जो विधिवत करार के आधार पर खेती करते हैं। चौथी श्रेणी में वे पात्र किसान हैं जिन्हें सरकार से ज़मीन का आवंटन हुआ है या जिन्हें कानूनी ज़मीन वितरण प्रक्रिया से ज़मीन मिली है। इनके अलावा सरकारी आदेश में बताए गए दूसरे समान और उचित अपवाद वाले मामलों में भी फार्मर आईडी दिया जा सकेगा।
आईडी देने से पहले कागज़ात की जांच तीन स्तरों पर होगी। पहले चरण में पटवारी गांव के पुराने और ताज़ा राजस्व रिकॉर्ड, ज़मीन का राजस्व भरने की रसीदें, इनाम रजिस्टर, प्रमाणपत्र, किरायानामा, करारनामा और ज़मीन आवंटन के आदेशों को देखेंगे। इन कागज़ात की प्रतियां एग्रीस्टैक प्रणाली पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। पात्र किसानों की सूची ग्राम चौपाल पर भी लगाई जाएगी।
दूसरे चरण में मंडल अधिकारी पटवारी की शुरुआती जांच को दोबारा परखेंगे और मौके की असल स्थिति भी देखेंगे। तीसरे चरण में तहसीलदार पटवारी और मंडल अधिकारी के जमा किए कागज़ात की अंतिम जांच करेंगे। मंज़ूरी मिलने के बाद किसान की खेती की ज़मीन के लिए स्थायी फार्मर आईडी जारी किया जाएगा।
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