पचमढ़ी में बंदर के पीछे भागे नागपुर के NCC टीचर विजय नायक 150 फीट खाई में गिरे, मौत
मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पर शुक्रवार सुबह सनराइज देखने गया नागपुर का ग्रुप हादसे का शिकार हो गया। 52 साल के विजय नायक की खाई में गिरकर मौत हो गई।
मध्य प्रदेश के मशहूर हिल स्टेशन पचमढ़ी में शुक्रवार 6 नवंबर की सुबह नागपुर के एक टीचर की जान चली गई। नर्मदापुरम जिले में आने वाले इस पर्यटन स्थल पर बंदर एक बैग लेकर भागा और उसके पीछे दौड़ते हुए विजय नायक करीब 150 फीट गहरी खाई में जा गिरे। कुछ रिपोर्ट में उनका नाम नाईक भी लिखा गया है।
विजय नायक नागपुर के खानखोजे नगर में रहते थे। वे रामदासपेठ के सोमलवार स्कूल से जुड़े थे और NCC टीचर के तौर पर जाने जाते थे। ताजा जानकारी के हिसाब से उनकी उम्र 52 साल थी। पचमढ़ी का यह ट्रिप उन्होंने खुद ही तय किया था। ग्रुप गुरुवार की शाम नागपुर से निकलकर पचमढ़ी पहुंचा था। उसमें अलग-अलग स्कूलों के करीब 20 बच्चे थे। साथ में एक महिला टीचर, उनकी 15 साल की बेटी और विजय के पिता भवानी नायक भी गए थे।
शुक्रवार तड़के ग्रुप प्रियदर्शिनी व्यू पॉइंट पहुंचा, जिसे फोर्सिथ पॉइंट भी कहा जाता है। सब पहाड़ियों और घाटियों के ऊपर सूरज निकलते देखने गए थे। लोग नजारे का मजा ले रहे थे और फोटो खींच रहे थे। सुबह करीब 6.45 बजे एक बंदर झपट्टा मारकर बैग ले उड़ा और व्यू पॉइंट के पथरीले किनारे की तरफ भागा। पचमढ़ी पुलिस स्टेशन के प्रभारी गोपाल घासले के मुताबिक यह बैग एक छात्रा का था। कुछ दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि बैग खुद विजय का था। इस बात पर तस्वीर साफ नहीं है।
पुलिस के मुताबिक विजय बैग वापस दिलाने के इरादे से बंदर के पीछे दौड़ पड़े। इसी भागदौड़ में वे सुरक्षा रेलिंग के उस पार चले गए और पहाड़ी के कगार के बेहद पास पहुंच गए। फिर पैर फिसला, संतुलन बिगड़ा और कुछ ही पल में वे नीचे पथरीली जमीन पर जा गिरे। बच्चों और परिवार के लोगों की आंखों के सामने सब कुछ चंद सेकंड में हो गया। वहां मची अफरातफरी में किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
खबर मिलते ही पचमढ़ी पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। जहां विजय गिरे थे, वह जगह दुर्गम थी। बचाव टीम को करीब तीन किलोमीटर पथरीले रास्ते पर पैदल चलना पड़ा और फिर खाई में उतरना पड़ा। नीचे विजय का शव मिला। साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुबह करीब 9.30 बजे शव को स्ट्रेचर पर ऊपर लाया जा सका।
शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जांच पूरी होने पर उसे रिश्तेदारों के हवाले किया गया, जो उसे वर्धा ले गए। कुछ रिपोर्ट में लिखा था कि शव नागपुर भेजा गया, पर परिवार के लोग उसे वर्धा ले गए, यही ताजा जानकारी है। हादसे के बाद ट्रिप पर आए बाकी लोगों को नागपुर लौटा दिया गया।
विजय के पीछे दो बेटियां हैं। पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। स्कूल में साथ पढ़ाने वाले लोग और जानने वाले भी सदमे में हैं। नागपुर में इस खबर से मातम पसरा है और शहर में हर कोई इसी की बात कर रहा है। जिस टीचर ने एक बच्ची की मदद के लिए दौड़ लगाई, वह वापस नहीं लौटा। उसकी किशोर बेटी और बुजुर्ग पिता वहीं मौजूद थे, इसलिए उनके लिए यह सदमा और भारी है।
इस हादसे के बाद पचमढ़ी के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की सुरक्षा का सवाल फिर उठा है। इलाके को जानने वाले कहते हैं कि कई जगह रेलिंग लगी ही नहीं है। वे बंदरों की बढ़ती दहशत की भी बात करते हैं। ये बंदर घूमने आए लोगों के हाथ से खाने-पीने की चीजें और बैग झपट लेते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर ऐसे हमलों में रोजाना पांच से 10 सैलानी जख्मी हो जाते हैं। यह दावा अभी अपुष्ट है। इस हादसे की सीख यही है कि छीनी गई चीज के पीछे भागना या सुरक्षा घेरा लांघना जान पर बन सकता है।
इसी बीच भंडारा जिले के माडगी में रामटेक-गोंदिया हाइवे पर आधी रात को एक और जानलेवा हादसा हुआ। यहां हाइवे पर सीमेंट की सड़क बन रही है। जगह-जगह निर्माण का सामान बिखरा पड़ा था और अंधेरे में रोशनी का कोई इंतजाम नहीं था। एक बाइक बेकाबू होकर गिर गई। बाइक चला रहे होमगार्ड जवान गजानन तिजारे (38) की मौत हो गई। शुरुआती अंदाजे के मुताबिक ठेकेदार ने वहां न दिशा बताने वाला बोर्ड लगाया था, न रेडियम रिफ्लेक्टर। मिट्टी के ढेर भी सड़क पर पड़े थे। मामले की जांच तुमसर पुलिस कर रही है।
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