वाशिम के 247 गांवों में पानी की किल्लत का खतरा, कलेक्टर ने सीएसआर कंपनियों और संस्थाओं से मदद मांगी
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वाशिम में इस साल बारिश की कमी से भूजल स्तर गिरा है और 247 गांवों में पानी की किल्लत की आशंका है। कलेक्टर ने जलसंधारण के कामों में कंपनियों और संस्थाओं को जुड़ने को कहा।
वाशिम जिले में आने वाले दिनों में पानी की किल्लत की आशंका को देखते हुए कलेक्टर योगेश कुंभेजकर ने स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व निधि (सीएसआर) के तहत काम करने वाली कंपनियों से जल संरक्षण के कामों में सक्रिय हिस्सा लेने की अपील की है। वे काटेपूर्णा सभागार में स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर भागीदारों की बैठक में बोल रहे थे।
बैठक में निवासी अपर कलेक्टर विश्वनाथ घुगे, मृदा और जल संरक्षण इंजीनियर हरेंद्र वाघमारे, आपदा प्रबंधन अधिकारी शाहू भगत, डॉ. हरिष बाहेती, अविनाश मारशेटवार, दीपा वानखेडे, डॉ. अर्चना मेहकर, वृषाली टेकाले और एडवोकेट भारती सोमाणी मुख्य रूप से मौजूद थे।
मृदा और जल संरक्षण विभाग की ओर से वाघमारे ने प्रस्तावित कामों की योजना और जरूरी निधि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में जून से सितंबर के बीच 485.78 मिलीमीटर बारिश हुई, यानी बारिश में 37.37 प्रतिशत की कमी रही। इसी वजह से 79 निरीक्षण कुओं में से 77 में भूजल स्तर औसतन 1.11 मीटर नीचे गया है। जिले के 247 गांवों में तीन चरणों में पानी की किल्लत पैदा होने की संभावना है। इसलिए जल भंडारों की क्षमता बढ़ाने और भूजल पुनर्भरण के कामों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है।
जिले में 'गादमुक्त बांध गादयुक्त खेत' और 'नाला गहरीकरण और चौड़ीकरण' योजनाएं चल रही हैं। संस्थाएं और सीएसआर भागीदार मशीनरी और ईंधन, गाद निकालने, जागरूकता, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और पात्र किसानों तक गाद पहुंचाने में सहयोग कर सकते हैं।
गाद निकालने के लिए मशीनरी और ईंधन के खर्च की दर 31 रुपये प्रति घनमीटर तय की गई है। गादमुक्त बांध गादयुक्त खेत योजना में पात्र किसानों को गाद की ढुलाई के लिए 35.75 रुपये प्रति घनमीटर अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए 15 हजार रुपये प्रति एकड़ और अधिकतम ढाई एकड़ तक के क्षेत्र में लाभ का प्रावधान है। नाला गहरा करने से निकली गाद की ढुलाई का खर्च नहीं दिया जाएगा।
संस्थाओं का चयन कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। संस्था का पंजीकृत होना, पिछले तीन साल का ऑडिट, पर्याप्त मानव बल और निगरानी और मूल्यांकन का अनुभव होना जरूरी है। कामों की जियोटैगिंग, काम से पहले और बाद की तस्वीरें, रोजाना गाद निकालने का ब्योरा और मशीनरी के काम का रिकॉर्ड 'अवनी ग्रामीण ऐप' पर दर्ज किया जाएगा।
कलेक्टर कुंभेजकर ने कहा कि संस्थाएं अपने कार्यक्षेत्र के हिसाब से तालुका और जल भंडार चुनें और मशीनरी या सीएसआर निधि के रूप में हिस्सा लें। संस्था का परिचय, पंजीकरण का ब्योरा, पहले किए गए कामों की जानकारी और वाशिम जिले के लिए प्रस्तावित कार्य योजना मृदा और जल संरक्षण विभाग को सौंपनी होगी।
प्रस्तावित योजना में तालाबों से गाद निकालने के 174 काम, नाला गहरा और चौड़ा करने के 176 काम और 5 सीमेंट भंडारण बांध शामिल हैं। तालाबों से करीब 32.5 लाख घनमीटर गाद निकालने की योजना है, जिससे लगभग 8 हजार 100 एकड़ खेती की जमीन को उपजाऊ गाद मिल सकेगी। साथ ही तालाबों की करीब 3.25 मिलियन घनमीटर भंडारण क्षमता फिर से बहाल करने का लक्ष्य है।
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