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15:52 IST

विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी का दिखना क्यों माना जाता है शुभ

दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन की मान्यता, 20 अक्टूबर के मुहूर्त और परंपरा की पूरी जानकारी।

विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी का दिखना क्यों माना जाता है शुभ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था, इसीलिए देश भर में दशहरा बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस साल दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को है।

धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक इस दिन एक खास पक्षी का दिखना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दशहरा के दिन इस पक्षी के दर्शन से जीवन में सौभाग्य, आनंद, समृद्धि और सफलता के दरवाजे खुलते हैं। इस पक्षी का नाम नीलकंठ है और उसे भगवान शिव का प्रतीक भी माना जाता है।

नीलकंठ को लेकर दो मान्यताएं बताई जाती हैं। एक मान्यता के अनुसार, राम ने लंका पर चढ़ाई करने और रावण को मारने से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे, जिससे उन्हें जीत मिली। दूसरी मान्यता यह है कि रावण को मारने के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भगवान शिव की प्रार्थना की। तब भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रूप में प्रकट हुए। इसी वजह से दशहरा के दिन नीलकंठ का दिखना शुभ शकुन और जीत का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू धर्म में विजयादशमी के दिन नीलकंठ का दिखना बहुत शुभ माना जाता है। श्रद्धा के अनुसार नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का प्रतीक है। समुद्रमंथन के समय जब भगवान शिव ने विष पिया, तो उनका कंठ नीला हो गया। इसी वजह से महादेव को नीलकंठ कहा जाता है।

विश्वास है कि दशहरा के दिन इस पक्षी के दर्शन से साल भर में जमा हुए पाप धुल जाते हैं और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। इसे घर की सुख-समृद्धि, धन और कामकाज में सफलता का प्रतीक भी माना जाता है। इसीलिए दशहरा पर नीलकंठ के दर्शन को खास अहमियत दी जाती है।

अब मुहूर्त की बात। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12.51 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2.11 बजे खत्म होगी। विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से दोपहर 2:45 तक रहेगा। दोपहर की पूजा का समय दोपहर 1:14 से 3:30 तक है, जो प्रदोष काल है। रावण दहन का समय शाम 5:47 बजे के बाद है।

परंपरा यह है कि दशहरा की सुबह लोग नीलकंठ को देखने के लिए घरों की छत पर या खुले मैदान में जाते हैं। नीलकंठ दिख जाए तो उसे शुभ शकुन माना जाता है। ऐसे में लोग हाथ जोड़कर एक पारंपरिक कहावत बोलते हैं: "नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो।"

धर्म, ज्योतिष और वास्तु जैसे विषयों की ऐसी जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह लेना जरूरी है।

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