सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
07:36 IST

विजयादशमी को क्यों माना जाता है साढ़े तीन मुहूर्तों में पूरा मुहूर्त, जानिए वजह

दशहरा यानी विजयादशमी को साढ़े तीन मुहूर्तों में एक पूरा मुहूर्त माना जाता है। जानिए इसकी वजह और धार्मिक मान्यताएं।

विजयादशमी को क्यों माना जाता है साढ़े तीन मुहूर्तों में पूरा मुहूर्त, जानिए वजह तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दशहरा यानी विजयादशमी को साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक पूरा मुहूर्त माना जाता है। भारतीय संस्कृति में त्योहारों का मतलब सिर्फ धार्मिक परंपरा निभाना नहीं है। उनका आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्त्व भी होता है। हर त्योहार के पीछे कोई पौराणिक कथा, जीवन मूल्यों का संदेश और मंगलमय जीवन की सोच छिपी रहती है। दशहरा ऐसा ही एक अहम त्योहार है।

यह त्योहार आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन नया व्यवसाय शुरू करना, घर खरीदना, वाहन लेना, सोना खरीदना और किसी नए काम की शुरुआत करना शुभ समझा जाता है। इसी दिन शस्त्रपूजन, सरस्वतीपूजन, वाहनपूजन और सीमोल्लंघन की परंपरा भी है। लोग आपटा के पत्ते सोने के तौर पर एक-दूसरे को देकर खुशी और समृद्धि की शुभकामनाएं देते हैं।

अब सवाल यह है कि दशहरे को ही पूरा मुहूर्त क्यों माना जाता है, इस दिन का धार्मिक महत्त्व क्या है और विजयादशमी पर नए काम की शुरुआत के पीछे कौन सी भावना है। इन्हीं बातों को आगे समझते हैं।

हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम करने से पहले मुहूर्त देखने की परंपरा है। विवाह, गृहप्रवेश, वास्तुशांति, व्यवसाय की शुरुआत, वाहन खरीद और धार्मिक विधियों के लिए तिथि, वार, नक्षत्र और पंचांग की दूसरी बातों का विचार किया जाता है। लेकिन साल के कुछ दिन ऐसे माने जाते हैं, जब शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त खोजने की आमतौर पर जरूरत नहीं पड़ती। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों को खास शुभत्व मिला हुआ है।

हिंदू परंपरा में गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया और विजयादशमी को तीन पूरे मुहूर्त माना जाता है। दिवाली के बलिप्रतिपदा के दिन को आधा मुहूर्त गिना जाता है। इसी साढ़े तीन मुहूर्त की सोच से साल के कुछ दिनों को शुरुआत के लिए खास अहमियत दी गई है।

दशहरा नवरात्रि उत्सव का समापन करने वाला दिन है। नौ दिन देवी के अलग-अलग रूपों की उपासना के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। इस दिन को शक्ति की उपासना, बुरी प्रवृत्तियों पर जीत और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। भक्तों के मन में यह भावना रहती है कि इस दिन किए गए काम को सफलता मिले, जीवन में समृद्धि आए और नई राह की शुरुआत अच्छी हो।

धार्मिक परंपरा के मुताबिक विजयादशमी का दिन शुभ माना जाता है, फिर भी हर तरह के काम के लिए स्थानीय पंचांग, धार्मिक विधि या कोई खास नियम लागू हो तो उसका भी विचार किया जाता है। इसलिए पूरा दिन शुभ होने की बात को श्रद्धा और परंपरा के संदर्भ में समझना ठीक रहता है।

दशहरे के महत्त्व के पीछे रामायण की कथा बताई जाती है। लंका के राजा रावण ने माता सीता का अपहरण किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने वानरसेना की मदद से लंका पर चढ़ाई की। राम और रावण के युद्ध में आखिरकार श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को छुड़ाया, ऐसी रामायण की कथा है। इस घटना की याद में विजयादशमी को अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है।

विजयादशमी का एक और धार्मिक संदर्भ देवी दुर्गा और महिषासुर की कथा है। पौराणिक कथा के मुताबिक महिषासुर अपनी ताकत के जोर पर देवताओं को सताने लगा था। उसके अत्याचार से परेशान देवताओं ने आदिशक्ति की आराधना की। तब देवी दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध किया और उसका वध किया। इस जीत की याद में नवरात्रि उत्सव में देवी के अलग-अलग रूपों की उपासना होती है और विजयादशमी पर शक्ति की जीत का उत्सव मनाया जाता है।

शस्त्रपूजन के बारे में कहा गया है कि भारतीय परंपरा में शस्त्रों को सिर्फ युद्ध का साधन नहीं माना गया, बल्कि धर्म और समाज की रक्षा का जरिया भी समझा गया। पुराने जमाने में राजा, योद्धा और सैनिक दशहरे के दिन शस्त्रपूजन करते थे। युद्धकला का प्रशिक्षण, शस्त्रों का सम्मान और जीत की कामना इस परंपरा से जुड़ी भावनाएं हैं।

किसी भी काम की कामयाबी सिर्फ मुहूर्त पर निर्भर नहीं होती। सही योजना, मेहनत, पैसों का अनुशासन, दूरदृष्टि और लगातार लगे रहने की भी उतनी ही अहमियत है। शुभ मुहूर्त नए सफर के लिए प्रेरणा और सकारात्मकता का सहारा बनता है।

साढ़े तीन मुहूर्तों में एक पूरे मुहूर्त के तौर पर दशहरे को हिंदू संस्कृति में खास जगह हासिल है। श्रीराम की रावण पर जीत, देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत, शस्त्रपूजन की परंपरा, सरस्वतीपूजन, सीमोल्लंघन और आपटा के पत्तों का सोना, ये सब बातें इस त्योहार की अहमियत को और उभारती हैं।

धर्म, ज्योतिष और वास्तु जैसे विषयों के लेख सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे