ग्रेटर नोएडा के बिसरख में है रावण का गांव, यहां दशहरे पर नहीं जलता रावण का पुतला
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में रावण का मंदिर है और लोग रावण को अपना पूर्वज मानते हैं, इसलिए यहां दशहरे पर पुतला नहीं जलाया जाता।
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कुछ ही दिन में दशहरा आने वाला है। इस साल यह त्योहार 20 अक्टूबर को देशभर में मनाया जाएगा। आम तौर पर इस दिन देशभर में जगह जगह रावण के पुतले को जलाकर त्योहार मनाया जाता है, क्योंकि बुराई पर अच्छाई की जीत इस त्योहार का मूल मकसद माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा है, जहां यह नजारा देखने को नहीं मिलता।
यह गांव उत्तर प्रदेश राज्य के ग्रेटर नोएडा का बिसरख है। यहां रावण का मंदिर देखने को मिलता है और आज भी रावण की पूजा की जाती है। इस गांव का नाम भी रावण के पिता से जुड़ा हुआ है। बिसरख नाम रावण के पिता, ऋषि विश्वराव के नाम पर रखा गया है। मूल रूप से यह गांव विश्वेश्वर के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में सहूलियत के लिए बदलकर बिसरख कर दिया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक शिवपुराण में विश्वेश्वर गांव का जिक्र मिलता है। शिवपुराण में लिखा है कि विश्वराव ऋषि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। रावण और उसके पिता, दोनों शंकर के बड़े भक्त थे।
रावण के इस मंदिर में एक पुजारी भी है। वह हर दिन मंदिर की साफ सफाई करता है और रावण की मूर्ति को पोशाक पहनाता है। लोग रावण के दर्शन के लिए यहां आते हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक बिसरख गांव के लोग रावण को अपना पूर्वज मानते हैं। यही वजह है कि यहां रावण दहन नहीं किया जाता और गांव में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। दशहरे के दिन लोग रावण के मंदिर में जाते हैं, दर्शन करते हैं और हवन यज्ञ में शामिल होते हैं।
मंदिर में रावण की कई प्रतिमाएं लगाई गई हैं। अंदर की तरफ प्राचीन अष्टभूमि शिवलिंग रखा गया है, जिस पर लोग पानी चढ़ाते हैं। इस गांव में रावण मंदिर और इस प्राचीन शिवलिंग की परंपरा को विशेष माना जाता है।