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07:36 IST

चंद्रपुर के माता महाकाली महोत्सव में 9,999 कन्याओं की पूजा, 42 नवजात बच्चियों को चांदी के सिक्के

चंद्रपुर में श्री माता महाकाली महोत्सव के दौरान 9,999 कन्याओं का पूजन हुआ और नवरात्रि में जन्मी 42 बच्चियों को चांदी के सिक्के भेंट किए गए।

चंद्रपुर के माता महाकाली महोत्सव में 9,999 कन्याओं की पूजा, 42 नवजात बच्चियों को चांदी के सिक्के तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर में श्री माता महाकाली महोत्सव के दौरान इस साल भी कन्यापूजन और भोजन का कार्यक्रम हुआ। आयोजकों की जानकारी के मुताबिक 9 हजार 9999 नहीं, बल्कि 9 हजार 999 यानी 9,999 कन्याओं का पूजन किया गया। यह महोत्सव विधायक किशोर जोरगेवार की पहल से आयोजित होता है।

कार्यक्रम में अलग-अलग समाजों की ओर से माता महाकाली की आरती की गई। नवरात्रि के दौरान जन्मी 42 बच्चियों को श्री माता महाकाली महोत्सव समिति की ओर से चांदी के सिक्के भेंट किए गए और इस तरह उनका स्वागत किया गया। इस पहल के जरिए बेटियों के जन्म को लेकर सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया गया।

गुजराती समाज की ओर से पेश किए गए दांडिया नृत्य ने उत्सव में रंग भर दिया। पारंपरिक दांडिया की ताल पर चले इस कार्यक्रम से महोत्सव में उत्साह का माहौल बना। इससे यह भी दिखा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ अलग-अलग समाजों की सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच मिल रहा है।

कबीर संस्कृति ग्रुप ने जागरण गीत पेश किए। भक्ति गीतों की प्रस्तुति के जरिए माता महाकाली के चरणों में श्रद्धा जताई गई। पारंपरिक धार्मिक गीतों से महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आध्यात्मिक रंग मिला और आए हुए श्रद्धालुओं ने भक्ति के रस का अनुभव किया।

नवरात्रि के उत्सव में कन्यापूजन का खास धार्मिक महत्त्व बताया गया है। कन्या में देवी का रूप देखकर उसकी पूजा करने की परंपरा श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। महोत्सव में 9,999 कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराया गया। कन्याओं के प्रति आदर, श्रद्धा और सम्मान की भावना जताई गई। पूजन और भोजन के लिए पहुंची बच्चियों की वजह से महोत्सव परिसर में खुशी और भक्ति का माहौल था।

विधायक किशोर जोरगेवार की पहल से हो रहे इस महोत्सव के जरिए धार्मिक परंपराओं को सहेजने के साथ समाज के अलग-अलग तबकों को एक साथ लाने की कोशिश की जा रही है। कन्यापूजन और भोजन का यह कार्यक्रम महोत्सव के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल बड़ी श्रद्धा से होने वाले इस कार्यक्रम से देवी की आराधना के साथ कन्या के सम्मान का संदेश दिया जाता है। धार्मिक परंपरा को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने वाला यह आयोजन महोत्सव की खासियत बन गया है।

इस आयोजन में 15 संस्थाओं के आरती में शामिल होने की बात भी सामने आई थी, जिसकी जानकारी महोत्सव के एक अलग कार्यक्रम से जुड़ी है। स्त्रीशक्ति के सम्मान का संदेश इस पूरे उपक्रम के जरिए दिया गया।

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