विदर्भ के सात में से छह एयरपोर्ट पर उड़ानें ठप, नागपुर की हवाई कनेक्टिविटी भी कमजोर
विदर्भ में सात एयरपोर्ट हैं, पर नागपुर को छोड़कर बाकी छह पर नियमित उड़ानें नहीं चल रहीं। नागपुर से भी सिर्फ 12 जगहों के लिए सीधी उड़ान है और कतर एयरवेज की दोहा उड़ान 22 अक्टूबर से बंद हो रही है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
विदर्भ तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां औद्योगिक क्रांति का दौर चल रहा है, लाखों करोड़ रुपये का निवेश खींचा जा रहा है और कई नए उद्योग लग भी चुके हैं। बाहर से लोग आए हैं और यहां से जुड़े भी हैं। अफसोस की बात यह है कि इस जुड़ाव का फायदा एविएशन सेक्टर को नहीं मिल पा रहा। नागपुर एयरपोर्ट के निजीकरण में जो देरी हुई, उसका खामियाजा आज भी भुगतना पड़ रहा है।
हालत यह है कि हम फ्लाइट बढ़ाने की मांग करते हैं, पर कंपनियां उल्टा फ्लाइट घटाकर हमें 'दो कदम' पीछे धकेल देती हैं। जब विदर्भ में नागपुर के साथ ही ऐसा सौतेला व्यवहार हो रहा है, तो अमरावती, गोंदिया, अकोला, यवतमाल और चंद्रपुर का हाल खुद समझा जा सकता है। गड़चिरोली में एयरपोर्ट बनाने की बात चल रही है, लेकिन सवाल यही है कि जब बाकी एयरपोर्ट को अब तक 'हवाई जहाज' नहीं मिले, तो गढ़चिरोली का क्या होगा?
विदर्भ की तरक्की को ध्यान में रखकर सात एयरपोर्ट पर काम किया गया था। इनमें से नागपुर ही ऐसा है, जो देश के बीचों-बीच होने के बावजूद सिर्फ 12 डेस्टिनेशन से जुड़ पाया है। अमरावती से फ्लाइट कभी शुरू होती है तो कभी बंद हो जाती है, गोंदिया की स्थिति भी लगभग यही है। यवतमाल, अकोला और चंद्रपुर की हवाईपट्टियों पर कभी-कभार ही हवाई जहाज उतरता है। नियमित हवाई सेवा के लिए ये अब भी तरस रहे हैं और इन सबको नागपुर पर ही निर्भर रहना पड़ता है। नागपुर पहुंचने में इन्हें जितना वक्त लगता है, उतने में अगर अपने जिले का एयरपोर्ट चालू होता तो वे 'दुबई' और 'दिल्ली' तक पहुंच सकते थे।
नेता और अधिकारी बातें तो बड़ी-बड़ी कर रहे हैं, पर हल नहीं निकाल पा रहे। अमरावती से अभी मुंबई के लिए हफ्ते में चार दिन, यानी सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को फ्लाइट मिलती है। वहां पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, इसलिए आने वाले उद्योगों को सूरत और अहमदाबाद से जोड़ना जरूरी होगा, पर ऐसी कोशिश कहीं दिखती नहीं। गोंदिया से हैदराबाद और इंदौर के लिए फ्लाइट शुरू हुई थी, जो अब बंद पड़ी है। 'उड़ान' स्कीम की 'हवा' निकल चुकी है।
नागपुर अब तक देश में दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, अहमदाबाद, नांदेड़ और गोवा को ही जोड़ पाया है। इस तरह अभी सिर्फ 10 घरेलू और 2 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें चल रही हैं। दोनों अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दोहा और शारजाह की हैं। कतर एयरवेज ने ऐलान किया है कि वह 22 अक्टूबर से 29 मार्च 2027 तक अपनी नागपुर-दोहा-नागपुर उड़ान वापस ले रही है। इसके बाद 22 अक्टूबर से नागपुर से सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बचेगी।
भोपाल, सूरत, जयपुर, विशाखापत्तनम, कोच्चि, कोयंबटूर, कालीकट, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, चंडीगढ़, रांची, लखनऊ और पटना जैसी जगहों से सीधी कनेक्टिविटी मिले, तो यहां के व्यापारियों और उद्यमियों के साथ छात्रों और नौकरीपेशा यात्रियों को भी काफी सहूलियत होगी। सिंगापुर, बैंकॉक और कुआलालंपुर जाने के लिए अभी कनेक्टिंग फ्लाइट का सहारा लेना पड़ता है। चेन्नई, बेलगावी, कोल्हापुर, औरंगाबाद, नाशिक और लखनऊ के बाद अब किशनगढ़ से भी सीधा हवाई संपर्क टूट गया है।
देश में पिछले कुछ सालों में एयरपोर्ट की संख्या तेजी से बढ़कर 160 के आसपास पहुंच गई है, जिनमें 17 इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। नागपुर का नाम भी इनमें शामिल है। अफसोस यह है कि नाम के इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सिर्फ 2 उड़ानें चल पाती हैं और उनमें से भी एक बंद होने वाली है। इंटरनेशनल रूट बढ़ाने की किसी ने कोशिश नहीं की। घोषणाएं काफी हुईं, पर किसी को कामयाबी नहीं मिली। दुनिया अब भी पहुंच से 'दूर' ही रह गई है।
काफी मशक्कत के बाद केंद्र से नागपुर एयरपोर्ट के निजीकरण को मंजूरी मिली और इसे जीएमआर को सौंपा गया। 'उड़ान' को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ी थीं, लेकिन सच्चाई यह है कि नागपुर से विमान बढ़ने के बजाय घटते चले गए। डेस्टिनेशन के नाम पर उंगलियों पर गिनने लायक जगहें ही हैं।
देश के मध्य में होने के बावजूद पूरे देश को जोड़ने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया। देश तो दूर, राज्य की राजधानी को छोड़कर कोई और फ्लाइट यहां से शुरू नहीं की जा सकी। जब राज्य को ही पूरी तरह नहीं जोड़ पाए, तो हमारे नेता 'उड़ान' भरने की बात कैसे कर सकते हैं?
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