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26 अक्टूबर को राष्ट्रीय खिमा दिवस, मुगलई दस्तरखान से स्ट्रीट फूड तक खिमा का सफर

हर साल 26 अक्टूबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय खिमा दिवस भारतीय खानपान की परंपरा और विविधता की याद दिलाता है।

26 अक्टूबर को राष्ट्रीय खिमा दिवस, मुगलई दस्तरखान से स्ट्रीट फूड तक खिमा का सफर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भारत में खाने को सिर्फ पेट भरने की चीज़ नहीं माना जाता, इसे एक उत्सव की तरह देखा जाता है। अलग-अलग त्योहारों और मौसम के हिसाब से बनने वाले पकवान लोगों के दिल के बहुत करीब होते हैं। ऐसे ही एक स्वादिष्ट और पुराने पकवान की याद में हर साल 26 अक्टूबर को राष्ट्रीय खिमा दिवस (National Keema Day) मनाया जाता है। खिमा का नाम सुनते ही खाने के शौकीनों के मुंह में पानी आ जाता है। बारीक कटा या पिसा हुआ मांस, गरम भारतीय मसाले और खुशबूदार सब्जियां मिलाकर बनने वाला यह पकवान भारतीय खानपान में अपनी अलग पहचान रखता है।

इस दिन को मनाने का मकसद इस पारंपरिक और ऐतिहासिक पकवान की खुशबू, उसके लाजवाब स्वाद और उसकी सांस्कृतिक जगह को दुनिया के सामने रखना है। आज के दौर में जब फास्ट फूड का चलन बढ़ रहा है, तब खिमा जैसी असली और पारंपरिक रेसिपी का मूल रूप बचाए रखना बहुत जरूरी हो गया है। 26 अक्टूबर को दुनिया भर में, खासकर भारत के होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट में खिमा की खास वैरायटी तैयार की जाती हैं। कई खाने के शौकीन इस दिन घर पर ही नई-नई खिमा रेसिपी बनाकर परिवार के साथ मजे से खाते हैं।

भारतीय खानपान में, खासकर उत्तर भारतीय और मुगलई पकवानों में, खिमा को बड़ा सम्मान मिला है। मुगल दौर में राजा-महाराजाओं के शाही दस्तरखान पर खिमा के कई तरह के प्रकार सजाए जाते थे। खिमा की खासियत यह है कि यह बहुत कम वक्त में पक जाता है और मसालों का स्वाद उसमें आसानी से उतर जाता है। इसी वजह से मुगल राजघराने के शाही शेफ ने खिमा बनाने के कई नए तरीके तैयार किए थे।

वक्त के साथ यह पकवान सिर्फ महलों तक सीमित नहीं रहा। यह आम लोगों के किचन तक पहुंचा और सड़क किनारे के मशहूर स्ट्रीट फूड स्टॉल तक भी आ गया। चाहे मुंबई का मशहूर खिमा-पाव हो या लखनऊ के खिमा पराठे, हर शहर का खिमा बनाने और परोसने का अपना अलग और निराला अंदाज है। यह सफर दिखाता है कि खिमा ने अपने बेहतरीन स्वाद से अलग-अलग संस्कृतियों और इलाकों को एक साथ जोड़ रखा है।

खिमा की सबसे बड़ी ताकत उसकी वर्सेटिलिटी है, यानी वह किसी भी चीज़ के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है। खिमा समोसा में कुरकुरे समोसे के अंदर खुशबूदार खिमा की स्टफिंग भरी जाती है, और शाम की चाय के साथ यह उत्तर भारत में बहुत पसंद किया जाता है। खिमा पराठा गेहूं के आटे में लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और खिमा का मिश्रण भरकर सेंका जाता है, और पंजाब व दिल्ली में नाश्ते के लिए पसंद किया जाता है। खिमा बिरयानी पारंपरिक चिकन या मटन बिरयानी का बढ़िया विकल्प है, जिसके हर निवाले में मसालों का भरपूर स्वाद मिलता है। महाराष्ट्र में, खासकर मुंबई में, बटर में सेंके नरम पाव के साथ मसालेदार भुना खिमा खाने का मजा ही कुछ और है।

इसके अलावा आजकल सोया खिमा या वेज खिमा जैसे शाकाहारी विकल्प भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, जिससे शाकाहारी खाने वाले भी इन चटपटे मसालों के प्रयोग का पूरा मजा ले पा रहे हैं।

राष्ट्रीय खिमा दिवस सिर्फ मांसाहारी या स्वादिष्ट खाने तक सीमित नहीं है। इसे भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा और विविधता का प्रतीक माना जाता है। खाना हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करता है। खिमा ऐसा पकवान है जो पारिवारिक दावतों, त्योहारों और दोस्तों की गेट-टुगेदर में खास तौर पर बनाया जाता है। जब परिवार साथ बैठकर किसी पारंपरिक पकवान का स्वाद लेता है, तो उससे अपनापन और एकता का एहसास पैदा होता है।

आज सोशल मीडिया पर फूड ब्लॉगर और शेफ इस दिन #NationalKeemaDay हैशटैग के साथ अपनी अनोखी रेसिपी शेयर करते हैं। इस डिजिटल दौर की वजह से भारत का यह पारंपरिक पकवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है। विदेशी पर्यटक भी भारत आकर असली भारतीय मसालों में बना खिमा चखने के लिए उत्सुक रहते हैं।

इस बार राष्ट्रीय खिमा दिवस को खास बनाना हो तो कुछ आसान तरीके आजमाए जा सकते हैं। बाजार से ताजा मटन, चिकन या सोया खिमा लाकर घर पर मटन खिमा मटर, खिमा घोटाला या दम खिमा बनाने की कोशिश की जा सकती है। अपने शहर के किसी पुराने या मशहूर ईरानी कैफे या रेस्टोरेंट में जाकर वहां मिलने वाले असली खिमा-पाव का स्वाद लिया जा सकता है। और अपनी पसंदीदा खिमा रेसिपी या फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर जरूर पोस्ट किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर 26 अक्टूबर का यह दिन भारतीय स्वाद, संस्कृति और खुशी का एक अनोखा उत्सव है। इस मौके पर अपने पसंदीदा खिमा पकवान का स्वाद लीजिए और इस समृद्ध परंपरा का हिस्सा बनिए।

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