बालों के लिए कौन से बीज खाएं? न्यूट्रिशनिस्ट मीनाक्षी अग्रवाल की सलाह
न्यूट्रिशनिस्ट मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया कि कद्दू, काला तिल, कलौंजी, नीम और मेथी के बीज संतुलित आहार में कैसे शामिल करें।
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बाल बढ़ाने हों या झड़ना रोकना हो, सूरजमुखी और कद्दू जैसे अलग-अलग बीज काम आ सकते हैं। इन बीजों में जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो बालों की कई जरूरतें पूरी करते हैं। अगर रोज के खाने में संतुलित मात्रा में बीज शामिल किए जाएं, तो वे बालों को मजबूती, रंग और चमक दे सकते हैं। न्यूट्रिशनिस्ट मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया है कि बालों की देखभाल के लिए कौन से बीज खाए जा सकते हैं।
मीनाक्षी अग्रवाल के मुताबिक सिर्फ अच्छा शैम्पू, तेल या हेयर मास्क लगाने से बालों की सेहत नहीं सुधरती। बालों की जड़ें लगातार नई कोशिकाएं बनाती रहती हैं, इसलिए उन्हें पूरा पोषण चाहिए। प्रोटीन, आयरन, जिंक और कुछ विटामिन या मिनरल की कमी से बाल झड़ सकते हैं, टूट सकते हैं और दूसरी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
बालों की अच्छी सेहत के लिए आयरन और जिंक सबसे अहम हैं। इसके अलावा ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, बायोटिन और विटामिन ए व डी भी जरूरी हैं। ये सारे पोषक तत्व बीजों में काफी मात्रा में मिलते हैं। संतुलित आहार में कद्दू के बीज, तिल और अलसी जैसे बीज शामिल करके इनकी भरपाई की जा सकती है।
जिन्हें ज्यादा बाल झड़ने की शिकायत है, वे अपने संतुलित आहार में कद्दू के बीज ले सकते हैं। इनमें जिंक भरपूर होता है। कोशिका विभाजन, प्रोटीन बनने और ऊतकों की मरम्मत में जिंक की बड़ी भूमिका होती है। बालों की जड़ें लगातार कोशिकाएं बनाती हैं और जिंक इस काम में मदद करता है। कद्दू के बीज कोशिकाओं के दोबारा बनने की प्रक्रिया बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
कद्दू के बीज एक या दो चम्मच, यानी सीमित मात्रा में खाने चाहिए। इन्हें सलाद, दही या दलिया में डालकर खाया जा सकता है। चाहें तो नाश्ते की तरह भी खा सकते हैं। ये बालों की सारी समस्याओं का पूरा इलाज नहीं हैं, लेकिन संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर बालों की सेहत में योगदान दे सकते हैं।
कलौंजी के बीज कई घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होते हैं। इनमें थायमोक्विनोन नाम का एक यौगिक होता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण बताए जाते हैं। कुछ क्लिनिकल अध्ययनों के मुताबिक इसे खाने से शरीर की सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव से राहत मिलती है। लगातार सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव खोपड़ी के माहौल पर असर डालते हैं, जिससे सीबम बनना बढ़ जाता है। सीबम पर पलने वाले बैक्टीरिया बढ़ते हैं और रूसी हो जाती है। रूसी से बाल झड़ सकते हैं और खोपड़ी में खुजली व जलन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
नीम के बीजों में जरूरी फैटी एसिड और मिनरल होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स को बेअसर कर सकते हैं और ऑक्सीडेटिव तनाव व सूजन घटा सकते हैं। रोज के खाने में इन्हें कम मात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इसका तेल लगाने से कुछ लोगों की खोपड़ी में जलन या एलर्जी हो सकती है।
काले तिल तांबा, आयरन, कैल्शियम और सेहतमंद चर्बी जैसे कई पोषक तत्व देते हैं। कई जरूरी एंजाइम के काम और सामान्य मेटाबॉलिज्म में तांबे की अहम भूमिका होती है। तांबे की कमी से भी बाल समय से पहले सफेद हो सकते हैं। बाल सफेद होने के कई कारण हैं, जैसे आनुवंशिकता, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, लाइफस्टाइल, दवाएं या मेडिकल स्थितियां। पोषक तत्वों की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसे सही और संतुलित आहार से दूर किया जा सकता है। आहार में काले तिल शामिल करने से शरीर को तांबा मिलता है, जिससे पोषण की कमी के कारण होने वाला बालों का जल्दी सफेद होना टाला जा सकता है।
काले तिल सलाद, चटनी, रोटी या दूसरी चीजों के जरिए खाए जा सकते हैं। रोज एक या दो चम्मच तिल लिए जा सकते हैं। कुछ लोगों को तिल से एलर्जी हो सकती है, इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखें।
मेथी के दानों में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई बायोएक्टिव यौगिक होते हैं। बाल मुख्य रूप से केराटिन नाम के प्रोटीन से बने होते हैं, इसलिए शरीर और बाल दोनों को पूरा प्रोटीन चाहिए। मेथी के दाने शरीर को ये पोषक तत्व देने में मदद कर सकते हैं। वे बालों की सामान्य बनावट बनाए रखने और उन्हें मजबूत करने में मदद करते हैं।
खाने में शामिल करना हो तो मेथी के दानों को भिगोकर फुला लें। अंकुरित कर लें तो और बेहतर है। आमतौर पर रोज एक चम्मच मेथी के दाने खाए जा सकते हैं। मेथी के दानों का पेस्ट भी काम का हो सकता है। इसे बालों में लगाने से स्पा जैसा अनुभव होता है और बाल कुछ समय के लिए मुलायम और चमकदार हो जाते हैं।
बीज खाएं, लेकिन ज्यादा नहीं। संतुलित आहार बनाए रखने के लिए इनकी मात्रा सीमित रखनी चाहिए। ये बीज पोषण की जरूरत पूरी करके बालों की सेहत में योगदान दे सकते हैं, मगर बालों की किसी भी समस्या के पहले इलाज के तौर पर इन्हें अपनाना गलत होगा। अगर पहले से बाल झड़ने, टूटने या रूसी जैसी दिक्कतें हैं, तो इधर-उधर भटककर घरेलू नुस्खे आजमाने की बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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