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व्हर्जिनिया के हाईवे पर प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कें टेस्ट में खरी उतरीं

अमेरिका के व्हर्जिनिया राज्य में रिसायकल प्लास्टिक और पुराने डांबर के मिश्रण से बनी सड़कें शुरुआती जांच में अच्छी हालत में मिली हैं।

व्हर्जिनिया के हाईवे पर प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कें टेस्ट में खरी उतरीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दुनिया भर में रोज हजारों टन प्लास्टिक कचरा निकलता है, जो प्रकृति और पर्यावरण के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो रहा है। इस कचरे का क्या किया जाए, यह वैज्ञानिकों और पर्यावरण के जानकारों के सामने बड़ा सवाल बन गया है। अब अमेरिका के वर्जीनिया (Virginia) राज्य के इंजीनियरों ने इसका एक हल निकाला है। इससे न सिर्फ प्लास्टिक कचरे का दोबारा इस्तेमाल हो रहा है, बल्कि सड़कों की मजबूती और उम्र भी काफी बढ़ रही है।

वर्जीनिया के छह मुख्य राज्य महामार्गों पर रिसायकल किए गए प्लास्टिक और पुरानी सड़कों के डामर का मिश्रण इस्तेमाल करके सड़कें बनाई गई थीं। टेस्ट के दौरान ये सड़कें बहुत अच्छी हालत में मिली हैं।

इंजीनियरों ने यह टेस्ट प्रोजेक्ट 2022 और 2023 के दौरान राज्य के छह अलग-अलग महामार्ग हिस्सों पर चलाया था। इसमें प्लास्टिक कचरे और पुरानी सड़कों से निकाले गए डामर (Reclaimed Asphalt Pavement - RAP) को अलग-अलग अनुपात में मिलाकर सड़क की ऊपरी सतह पर लगाया गया। सड़कें ट्रैफिक के लिए खुलने के कुछ समय बाद जब जानकारों ने उनकी जांच की, तो उनकी हालत पारंपरिक तरीके से बनी सड़कों से भी बेहतर पाई गई।

इस टेस्ट का असल मकसद यह देखना था कि बेहद कठिन मौसम और रोज चलने वाले भारी वाहनों की आवाजाही में यह नई तकनीक और सामग्री कैसा काम करती है। प्रयोग में कुछ हिस्सों में 40 प्रतिशत तक पुराना डामर (RAP) इस्तेमाल हुआ। आम तौर पर जब सड़क खराब होती है या उसकी मरम्मत की जाती है, तो पुरानी सड़क खोदकर वह सामग्री फेंक दी जाती है या कहीं जमा करके रखी जाती है।

लेकिन वर्जीनिया ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च काउंसिल (VTRC) के शोधकर्ताओं ने इस पुराने डामर पर खास प्रोसेस करके उसे नए मिश्रण में शामिल किया। डामर में एक खास तापमान पर प्लास्टिक मिलाया जाए, तो प्लास्टिक एक बाइंडिंग एजेंट की तरह, यानी चिपकाकर रखने वाले तत्व की तरह काम करता है। इससे सड़क में पानी का रिसाव कम होता है, गड्ढे पड़ने की संभावना घटती है और सड़क की वहन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

वर्जीनिया ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च काउंसिल की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच में छहों हिस्सों की ऊपरी हालत बहुत अच्छी और गड्ढों से मुक्त मिली है। सतह पर पड़ने वाली दरारें, घिसाई और वाहनों के वजन से बनने वाले गड्ढे, इन सब मामलों में प्लास्टिक वाली इन सड़कों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

फिर भी शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि ये नतीजे फिलहाल शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। सड़क अलग-अलग मौसम में, जैसे तेज गर्मी, भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश में लंबे समय तक कैसी टिकती है, यह देखने के लिए अभी कुछ साल लगातार निगरानी करनी पड़ेगी। इसके बावजूद इस शुरुआती कामयाबी से दुनिया भर के सड़क विकास प्राधिकरणों और सिविल इंजीनियरों में नई उम्मीद जगी है।

प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने की इस तकनीक का दोहरा फायदा है। पहला, जो प्लास्टिक की बोतलें, थैलियां और दूसरा बेकार सामान समुद्र में या लैंडफिल में जमा होकर प्रदूषण फैलाता है, उसे सड़क के रूप में लंबे समय के लिए सुरक्षित जगह मिल जाती है। दूसरा, सड़क बनाने में लगने वाले प्राकृतिक डामर (Bitumen) का इस्तेमाल कम होता है, जिससे कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और सड़क बनाने का कुल खर्च भी काफी कम हो जाता है।

भारत जैसे विकासशील देश में भी कुछ जगहों पर प्लास्टिक सड़कों के प्रयोग चल रहे हैं। लेकिन वर्जीनिया में जिस तरह पुरानी सड़कों और प्लास्टिक को साथ मिलाकर हाईवे स्तर की सड़कें कामयाबी से बनाई गई हैं, वह दुनिया भर के महामार्ग प्राधिकरणों के लिए एक आदर्श मॉडल बन रहा है। अगर यह प्रयोग पूरी तरह कामयाब साबित हुआ, तो आगे चलकर दुनिया भर की सड़कें ज्यादा टिकाऊ, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनेंगी, इसमें शक नहीं।

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