आठ देशों में सड़कों पर उतरी भीड़, तीन जगह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर खतरा
12 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के कम से कम आठ देशों में तीखे आंदोलन और प्रदर्शन चल रहे हैं। इनमें से तीन देशों में प्रधानमंत्री का पद सीधे खतरे में है।
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दुनिया के अलग-अलग कोनों से इन दिनों बेचैन करने वाली खबरें आ रही हैं। 12 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम आठ देशों में तीखे आंदोलन और प्रदर्शन चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से तीन देशों में प्रधानमंत्री का पद सीधे खतरे में आ गया है, जबकि दो देशों में पढ़ाई-लिखाई के सवाल पर छात्र और आम लोग सड़क पर हैं।
पहले अपने देश की बात करें तो भारत में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी माहौल गरम है। दिल्ली, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। लोकसभा में विरोधी पक्ष के नेता राहुल गांधी का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं है, बल्कि भारत के बुनियादी लोकतंत्र को बचाने की है। इस आंदोलन की अगुवाई विरोधी पक्ष कर रहा है और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बड़ी खींचतान चल रही है।
यूरोप में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ तीखे प्रदर्शन हो रहे हैं। वहां के आंदोलनकारियों का कहना है कि देश की शिक्षा प्रणाली में फौरन और जड़ से सुधार की ज़रूरत है। इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि कुछ कट्टरपंथी तत्व शिक्षा के नाम पर फ्रांस में सामाजिक अशांति फैला रहे हैं।
स्पेन की राजधानी मद्रिद में लोग भीषण आवास संकट से जूझ रहे हैं। घरों की बढ़ती कीमतों और लोगों को घर से बेदखल (Eviction) किए जाने के खिलाफ वहां भारी नाराज़गी है। इस बढ़ते दबाव के बीच स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने आखिरकार तय समय से पहले चुनाव कराने का एलान कर दिया है। इस फैसले से उनके अपने प्रधानमंत्री पद पर बड़ा खतरा खड़ा हो गया है। उधर ब्रिटेन की राजधानी लंदन में फिलिस्तीन के समर्थन में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे हैं, तो दूसरी तरफ दक्षिणपंथी विचारधारा वाले गुट भी प्रदर्शन कर रहे हैं।
भारत के पड़ोसी पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनके समर्थकों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू किए हैं। खैबर प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इमरान खान के समर्थन में एक बड़े मार्च का एलान किया था। इसके बाद पाकिस्तानी सरकार ने उन्हें तुरंत पद से हटा दिया और खैबर प्रांत में आपातकाल घोषित कर दिया। इमरान के समर्थक मौजूदा प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे हैं।
इज़रायल में 7 अक्टूबर को तेल अवीव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भारी गुस्सा दिखा। 7 अक्टूबर 2023 को सुरक्षा में हुई नाकामी और लापरवाही को लेकर लोग उनसे बेहद नाराज़ हैं। 24 अक्टूबर को नेतन्याहू के खिलाफ एक और बड़ा आंदोलन तय है। खास बात यह है कि अक्टूबर के आखिर में इज़रायल में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने वाले हैं, इसलिए नेतन्याहू के लिए यह वक्त काफी कड़ी परीक्षा का है। वहीं दक्षिण अमेरिका के चिली में शिक्षा के बजट में कटौती के खिलाफ छात्रों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।